सतीश चांडक

सुकमा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सीआरपीएफ के एक अधिकारी वैभव विभोर ने बस्तर में पदस्थापना के समय एक कन्या छात्रावास की छात्राओं को वचन दिया था कि वो उनके छात्रावास में टीवी लगवाएंगे। नियति का खेल देखिए। उन्हें वचन देने के बाद कोरानाकाल शुरू हो गया। वैभव का भी बिहार ट्रांसफर हो गया। इस बीच एक घटना में वे नक्सलियों के द्वारा लगाए गए आइईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए। लंबे समय तक उनका उपचार चला। इस घटना में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए। इस बीच उन्हें अपने वचन का स्मरण हुआ। उसके बाद सीआरपीएफ के स्थानीय अधिकारी की सहायता से उन्होंने उक्त छात्रावास के लिए टीवी भिजवाया।

जिला मुख्यालय स्थित सीआरपीएफ 2 बटालियन में तैनात सहायक कमांडेंट वैभव विभोर ने आदिवासी छात्रावास में अध्यनरत छात्राओं का दिल जीत लिया। ये कहानी 2019 की है जब सुकमा रहते हुए सहायक कमांडेंट वैभव विभोर रामाराम कैंप से सर्चिग के लिए निकले थे। तब वो सर्चिग के दौरान तेलावर्ती पहुंचे जहां स्थित कन्या छात्रावास की छात्राओं से बातचीत की और उनसे पूछा कि वो आप लोगो के लिए क्या कर सकते हैं?

छात्राओं ने बताया कि बाकी सब सुविधा है, लेकिन यहां पर टीवी की कमी है। जिसके कारण वो ना तो समाचार देख पाती हैं। और ना ही अन्य देश-दुनिया की खबरें। तब वैभव विभोर ने उन छात्राओं को वचन दिया था कि जल्द यहां पर टीवी लगाऊंगा। लेकिन बाद में कोरोना काल शुरू हुआ और स्कूल, आश्रम, छात्रावासों की छुट्टियां हो गई।

फरवरी 2021 में उनका स्थानातंरण कोबरा 205 गया (बिहार) में हो गया। लेकिन तीन साल बाद उन्होने अपना वादा पूरा करते हुए रक्षाबंधन के अवसर पर सीआरपीएफ-दो बटालियन के अधिकारियों की सहायता से तेलावर्ती आश्रम में टीवी पहुंचाई। टीवी लगने के बाद छात्राएं प्रसन्न् हैं। नईदुनिया के माध्यम से छात्राओं ने सीआरपीएफ अधिकारी वैभव विभोर को धन्यवाद दिया है।

आइईडी ब्लास्ट में दोनो पैर खो चुके

कोबरा 205 में स्थानातंरण होने के बाद वो औरंगाबाद के मदनपुर थानाक्षेत्र में नक्सलियों द्वारा लगाई गई आइईडी की चपेट में आ गए थे। उस घटना में वैभव विभोर बुरी तरह जख्मी हो गए। जिसके बाद प्राथमिक उपचार किया गया और फिर उन्हे दिल्ली लाया गया। जहां इलाज के बाद वैभव ने अपने दोनो पैर खो दिए और उनक हाथ में अंगुलिया भी काटनी पड़ी। सुकमा में पदस्थापना के समय वैभव ने नक्सलियों के खिलाफ बड़े-बड़े आपरेशन किए थे ।

नहीं भूला था अपना वचन: वैभव

नईदुनिया से चर्चा करते हुए सीआरपीएफ कोबरा 205 के सहायक कमांडेंट वैभव विभोर ने बताया कि वो 2018 से 21 तक जिले के रामाराम कैंप में पदस्थ है। और उस दौरान आसपास सर्चिग के लिए निकलते थे तो ऐसे ही आश्रम, स्कूल में जाकर बच्चों से बातें किया करते थे। उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते थे।

इसी तरह मैं तेलावर्ती गया था। वहां की छात्राओं ने मुझसे कहा कि हम टीवी ना होने के कारण देश-दुनिया की खबरे नहीं देख पाते है। वो बात मेरे दिल को छू गई और मैने टीवी देने का वादा किया। लेकिन बाद में ऐसी परिस्थिति बनी और तीन साल बाद में उन तक टीवी पहुंचा पाया। वहां टीवी लगने के बाद मैंने छात्राओं से बात की और मुझे बहुत अच्छा लगा।

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