रंजीत बराठ, सुकमा। Sukma News: जिले में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए ग्रामीण पुरी तरह से जागरूक हो चले हैं। कलेक्टर चंदन कुमार द्वारा साप्ताहिक बाजार पर रोक हटाने के बाद भी ग्रामीण अपने-अपने क्षेत्र में बाजार लगने नहीं दे रहे हैं। गुरुवार को सोनाकुकानार में साप्ताहिक बाजार ग्रामीणों ने नहीं भरने दिया तो वही शुक्रवार को दो बड़े साप्ताहिक बाजार केरलापाल व बुरदी पर भी ग्रामीणों ने रोक लगाकर रखी जिसके चलते व्यापारियों को उल्टे पांव वापिस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना हैं कि भले ही बाजार कुछ समय के लिए बंद रहे, लेकिन कोरोना का संक्रमण यहां नहीं फैलना चाहिए। आप को बता दे कि सीमावर्ती राज्य ओड़िसा के मलकानगिरी में अभी तक कोरोना के 21 मरीज सामने आए हैं और यह इलाका सुकमा जिले से लगा हुआ है। मलकानगिरी में कोरोना मरीज आते ही कलेक्टर सुकमा ने जिले भर में करीब 2 सप्ताह तक साप्ताहिक बाजारों पर रोक लगा रखा था, जिसे उन्होंने बुधवार को थिथिल करते हुए वापिस संचालन की अनुमति दे दी थी।

वापिस लौटे व्यापारी

बुरदी व केरलापाल में सफ्ताहिक बाजार नहीं लगने से बेरंग वापिस सुकमा लौटे व्यापारी राधेश्याम केला व पंकज टावरी ने बताया कि सुबह होते ही हम सफ्ताहिक बाजार के लिए निकले थे, लेकिन वहां जाकर पता चला कि आज बाजार नहीं भरेगा। पूछने पर ग्रामीणों ने बताया कि बाजार में दूसरे राज्य के व्यापारी आएंगे जिन्हें रोकना संभव नहीं। इसलिए कुछ सफ्ताह तक रोक जारी रहेगी। ग्रामीणों का कहना हैं हम नहीं चाहते कि कोरोना का संक्रमण यहाँ फैले इसलिए एहितयात बरतते हुए यह कदम उठा रहें हैं। बता दें कि जिला मुख्यालय से बुरदी 27 किमी व केरलापाल 18 किमी की दूरी पर स्थित हैं।

पहले भी ग्रामीणों ने की है कड़ाई

देश भर में लॉक डाउन-1 के लागू होते ही जिले भर में ग्रामीणों ने जागरूकता दिखाते हुए अपने-अपने गांव के लिए अलग नियम बनाते हुए जोरदार कड़ाई की थी। गांव के प्रवेश द्वार पर ग्रामीणों ने बड़े खोटले डालकर या बाँस की बाड़ी बनाकर मार्ग को बंद करके रखा था और गांव में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह निषेध था। फिर धीरे-धीरे परिस्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने ढील दी थी।

शहर के मुकाबले ग्रामीण ज्यादा जागरूक

जिले में शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता ज्यादा नजर आ रही हैं और ग्रामीण कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रसाशन की हर संभव मदद कर रहें हैं। पहले भी जब जंगल के रास्ते दूसरे राज्य से मजदूर वापिस लौट रहे थे तो ग्रामीण गांव के बाहर ही उन्हें रोकाकर प्रसाशन को तुरंत इसकी सूचना दे रहे थे। वहीं पडोसी राज्य की सीमा पर मौजूद गांव में भी ग्रामीणों ने सीमा सील करके बाकायदा वहां प्रवेश निषेध का बैनर लगा रखा हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों में परिस्थिति बिल्कुल विपरीत हैं। प्रशासन द्वारा लाख समझाईश देने के बाद भी जगह-जगह भीड़ देखी जा सकती है। मास्क नहीं लगाना व शारीरिक दूरी का खुला उल्लंघन जिला मुख्यालय में देखा जा रहा है।

Posted By: Himanshu Sharma

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