प्रतापपुर । नईदुनिया न्यूज

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देश पर तमोर पिंगला अभयारण क्षेत्र में निर्मित एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर की वैद्यता की जांच करने आई तीन सदस्ययी टीम ने मंगलवार को इसका भ्रमण किया। इस दौरान यहां पांच कुमकी हाथी सहित अन्य दो हाथी सिविल बहादुर एवं सोनू के रहवास के साथ उनके रखरखाव का निरीक्षण करते हुए शिकायतकर्ता राकेश मित्तल व ग्रामीणों से बातचीत की। शिकायतकर्ता ने इस रेस्क्यू सेंटर की वैद्यता पर सवाल खड़ा करने के साथ हाथी को बंधक बनाए जाने जैसे आरोपो के साथ अधिकारियों पर वन अपराध कायम करने की मांग की। टीम ने परीक्षण उपरांत इस संबंध में कुछ भी कहने से इंकार करते हुए रिपोर्ट सिजेडए को सौपने की बात कही है।

सूरजपुर वनमंडल के अंतर्गत तमोर पिंगला अभयारण क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लगभग दो वर्ष पूर्व एलीफैंट रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कराया गया था। जिसमें लगभग साढ़े सात हेक्टयर में इसके निर्माण के साथ कर्नाटक से लाये गए पांच कुमकी हाथी सहित अचानकमार अभयारण से सिविल बहादुर एवं सोनू हाथी को इस सेंटर में रखा गया था। विभाग के आला अधिकारियों की मंशा के अनुरूप इस सेंटर के निर्माण के पीछे उस दौरान यह तर्क दिया गया था, कि यहां पर कर्नाटक से पांच कुमकी हाथी को माकूल जंगली वातावरण में रखते हुए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे यह दल प्रतापपुर सहित आसपास क्षेत्र में उत्पात कर रहे जंगली हाथियों को नियंत्रित करते हुए उन्हें जंगल से लगे आबादी क्षेत्र से दूर भगाएंगे। विभाग की योजना के अनुसार कुमकी हाथियों का यह दल स्वछंद विचरण कर रहे जंगली हाथियों को नियंत्रित करते हुए इस रेस्क्यू सेंटर तक लाएंगे, जिससे क्षेत्र में बढ़ रही जंगली हाथियों के उत्पात पर विराम लग सकेगा। इसी मंशा के साथ इस सेंटर का निर्माण करते हुए इसमें कर्नाटक से पांच कुमकी हाथियों को लेकर रखा गया साथ ही अचानकमार से अन्य दो हाथी सिविल बहादुर एवं सोनू को भी यहां शिफ्ट कर दिया गया। पिछले एक वर्ष से इन हाथियों को इस रेस्क्यू सेंटर में रखा तो गया है परंतु विभाग ने जिस उद्देश्य को बताते हुए इसको काफी प्रचारित किया था, वह उद्देश्य आज तक पूरा नहीं किया जा सका। विभाग ने अभी तक न तो इन्हें कभी रेस्क्यू सेंटर से बाहर ले जाकर जंगली हाथियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया और न ही इनकी हो रही उपयोगिता को सार्वजनिक किया, बल्कि दूसरी ओर इन हाथियों के कुमकी होने पर सवाल के साथ सेंटर की वैद्यता जैसे आरोपो से यह पुनर्वास केंद्र कई मर्तबा विवादों में रहा। इन्ही आरोपो के साथ रायपुर के वन्यप्राणी प्रेमी नितिन सिंघवी एवं प्रतापपुर के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मित्तल ने सीजेडए व प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी शिकायत की थी, जिसपर सीजेडए ने टीम गठित कर इसमें कर्नाटक के रिटायर्ड पीसीसीएफ वीके सिंह, बायोलजिस्ट अजय ए देसाई एवं बिलासपुर की एक एनजीओ से मंसूर खान को नियुक्त किया, जिन्होंने मंगलवार को रेस्क्यू सेंटर का भ्रमण किया। ग्रामीणों से भी चर्चा की गई। ग्रामीणों ने रेस्क्यू सेंटर को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि रेस्क्यू सेंटर में रखे गए हाथियों को आसपास के जंगलों में चराया जाता है, जिससे जंगल नष्ट हो रहे हैं। हाथियों को यहा लाने का भी कोई फायदा नहीं हुआ। टीम ने सिविल बहादुर हाथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की और उसके उपचार में लगे चिकित्सकों से संपूर्ण जानकारी ली। इस दौरान वाइल्डलाइफ सीएफ सरगुजा एसएस कंवर, उपनिदेशक एलीफेंट रिजर्व सरगुजा प्रभाकर खलखो, तैमोर पिंगला अभ्यारण्य क्षेत्र के अधीक्षक जयजीत केरकेट्टा, अमलेंदू मिश्रा, शिकायतकर्ता राकेश मित्तल मौजूद थे।

क्यों सवाल खड़े हो रहे है वैद्यता पर-

वन्यप्राणी प्रेमी नितिन सिंघवी ने बताया कि वन्य प्राणियों को किसी भी प्रकार से सुनिश्चित स्थान में रखने के पूर्व इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से इसके निर्माण की अनुमति लेनी पड़ती है, निर्माण के बाद इसकी मान्यता के लिए पुनः प्राधिकरण को आवेदन करना होता है। जिसमे प्राधिकरण द्वारा गठित टीम द्वारा निर्मित सेंटर का निरीक्षण किया जाता है। टीम निरीक्षण के उपरांत प्राधिकरण को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करती है, जिसमें वन्यप्राणियों के लिए इसे उपयुक्त पाए जाने पर ही इसे वन्यप्राणियों को रखने की अनुमति प्रदान की जाती है। तमोर पिंगला अभयारण में निर्मित रेस्क्यू सेंटर के मामले में विभाग ने इसके निर्माण की अनुमति तो ली, परंतु सीजेडए से मान्यता के लिए कोई प्रक्रिया न अपनाते हुए यहां पर कुमकी सहित अन्य दो हाथियों को शिफ्ट कर दिया। जिसपर इसकी वैद्यता पर सवाल खड़े हो गए है।

हाथी के रहवास पर गंभीर आरोप-

सीजेडए द्वारा गठित टीम ने हाथी पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां तैनात महावत के अलावा अन्य कर्मियों से बातचीत की। दल प्रमुख रिटायर्ड पीसीसीएफ वीके सिंह ने शिकायतकर्ता राकेश मित्तल से चर्चा की। इस दौरान राकेश मित्तल ने आरोप लगाया कि सीजेडए की मान्यता से पूर्व ही हाथियों को रखना पूर्णतः अवैद्य है। इस स्थिति में वन्य प्राणियों को यहां रखना उन्हें बंधक बनाए रखने जैसा है जिसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर वन अपराध कायम किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाथियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक न रखते हुए स्थानीय सामान्य पशु चिकित्सक से इलाज कराया गया। जिसमें हाथी सीविल बहादुर के फोड़े का इलाज समुचित नही हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में यहां वन्यप्राणियों के इलाज के लिए दो नए चिकित्सक की नियुक्ति की गई है, नियमानुसार इन्हें वन्यप्राणियों के इलाज के लिए अहमदाबाद से ट्रेनिंग दी जानी थी, लेकिन विभाग ने इस प्रक्रिया को भी नहीं अपनाया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि सीविल बहादुर हाथी का एक दांत भी आधा से ज्यादा गायब है, जिसके लिए विभाग से कई मर्तबा जानकारी मांगी गई, परंतु विभाग ने उपलब्ध नहीं कराया। राकेश मित्तल ने आरोप लगाए कि हाथी को जंजीर में बांधने के साथ हाथियों के नियुक्त कर्मचारी नियमित नहीं है साथ ही कई महावत प्रशिक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां रखे गए दो मादा हथिनी को गर्भवती होने के बाद भी रायगढ़ क्षेत्र में गणेश हाथी के रेस्क्यू के लिए भेजा गया था, जो प्रताड़ना से कम नही है। राकेश मित्तल ने पूरे मामले पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वन अपराध कायम करने की भी मांग की है।

प्रतिवेदन सीजेडए को सौंपा जाएगा

सीजेडए से गठित तीन सदस्ययी निरीक्षण दल के प्रमुख कर्नाटक के रिटायर्ड पीसीसीएफ वीके सिंह ने जांच के उपरांत कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सीजेडए के निर्देश पर हमलोगों ने यहां पर निर्धारित हर पहलू का निरीक्षण करने के साथ शिकायतकर्ता राकेश मित्तल से चर्चा कर ली है। यह रिपोर्ट गोपनीय है, इसलिए सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पूरी रिपोर्ट सीजेडए को सौप दी जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network