बैकुंठपुर (नईदुनिया न्यूज)। नवरात्र में शहर की सड़कों पर चहल-पहल नजर आती थी। लेकिन पहली भक्तों की कोई भीड़ नजर नहीं आ रही है। मंदिर में सिर्फ एक पुजारी एक जोत जलाकर आराधना कर रहे हैं। ना पूजा पाठ में सामूहिक रूप से भीड़ जुट रही है और न ही माता के सेवा गीत गाए जा रहे हैं। हाल यह है कि मंदिर जाने वाले रास्ते भी सुनसान नजर आ रहे हैं।

कोरोना वायरस की संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लागू किया गया। कर्फ्यू ने लोगों को घरों में कैद कर रखा है और इससे लोगों की आस्था पर भी एक तरह से लक्ष्मण रेखा खींची गई है। जो भक्त पहले मंदिर में जाकर अपनी आस्था प्रकट करते थे। माता को पंचमी पर चुनरी चढ़ाते थे। श्रृंगार सामग्री भेंट करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता था, आज इस कर्फ्यू पर कोई माहौल नजर नहीं आ रहा है। नवरात्र जैसा माहौल जिले में कहीं पर भी नहीं लग रहा है।

लोगों को इकट्ठा होने से रोकने किये गये थे इंतजाम

नवरात्र के पहले कलेक्टर डोमन सिंह ने मंदिर प्रमुखों की बैठक लेकर तय कर दिया था कि हमें इस बार किस तरह से नवरात्र मनाना है। 21 दिनों तक दोबारा लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद मंदिर समितियों ने भी निर्णय बदला और नवरात्र में सामूहिक जोत नहीं जलाया। ना ही कोई मेला महोत्सव का आयोजन हुआ। जिसके चलते इस बार मंदिरों में सन्नाटा है। यह फैसला सही मायने में वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए लिया गया, ताकि भीड़ न जुटे और फैसले का असर भी देखने को मिला।

चौपाटी सूनसान तो गार्डन हुए विरान

लॉकडाउन में बैकुंठपुर शहर की चौपाटी और गार्डन भी सूनसान नजर आ रहे हैं। जहां पहले सुबह से देर शाम तक चहल-पहल दिखाई देती थी, जहां शहर भर के लोग आते थे। क्योंकि बगल में बस स्टैंड भी है, ऐसे में कर्फ्यू और कोरोना वायरस से रोकथाम की इस व्यवस्था ने इन जगहों की हलचल को ही समाप्त कर दिया है। सब जगह वीरानी छाई हुई है।

रामायण-महाभारत देख काट रहे वक्त

4 दिन पहले दूरदर्शन में रामायण और महाभारत का एक साथ प्रसारण शुरू किया गया है। ताकि लोग घर पर रहकर इसका आनंद उठा सकें और रामायण से अपने जीवन स्तर को भी सुधार सकें। रोज सुबह 9 से 10 बजे तक 1 घंटे तक बिना ब्रेक इसका प्रसारण हो रहा है। महाभारत शाम 7 बजे से प्रसारित हो रहा है। इस वजह से घरों में भी माहौल बदलने लगा है। लोग परिवार सहित दोनो सीरियल देख रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी इसे उत्सुकता से देख रही हैं क्योंकि यह सीरियल लगभग 33 साल पुराना है। जब डीटीएच का जमाना नहीं था तब इस तरह के सीरियल एंटिना वाले टीवी के जरिए दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ करते थे। उस समय कई घरों में ब्लैक एंड वाइट टीवी हुआ करती थी। कलर टीवी भी देखने को नहीं मिलता था। ऐसे समय में आज जब हर घर कलर टीवी है तो लोग उस पुराने सीरियल को भी उत्सुकता और उत्साह के साथ देख रहे हैं।

लोगों ने घरों पर की अपने आराध्य की पूजा

कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन से सभी अपने घरों में रामनवमी मनाया। गौ पूजन और गरीब बच्चों को खाना देकर किया। नवरात्र का अन्न पारण, घर में की रामनवमी की पूजा की गई। नवरात्र का व्रत रखने वाले ज्यादातर भक्तों ने नौ कन्याओं के बजाय गौ पूजन किया। गौ को भोजन कराया, आस पास की झुग्गियों में रहने वाले गरीब बच्चों को भोजन कराया। इसके बाद अन्न पारण कर व्रत पूरा किया। ऐसा पहली बार हुआ है जब नवरात्र का व्रत रखने वाले भक्तों ने नवमी को कन्या पूजन नहीं किया है। जबकि मान्यता अनुसार नवमी को नौ कन्याओं को नौ देवियों का रूप मानकर लोग उनका मनुहार करते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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