प्रतापपुर(नईदुनिया न्यूज)। बिहार एवं वाड्रफनगर क्षेत्र के कई मजदूर पैदल अंबिकापुर क्षेत्र से निकलकर दो दिनों में प्रतापपुर पहुंचे। इसकी सूचना मिलने पर समाजसेवी राकेश मित्तल की टीम व स्थानीय पुलिस कर्मियों ने भोजन कराया। आगे वाहन की व्यवस्था न होने पर भोजन के बाद सभी वाड्रफनगर की ओर पैदल ही चले गए। इनसे मिली जानकारी के अनुसार इनके मालिकों ने इन्हें न तो पूरा वेतन दिया और न ही जाने की व्यवस्था कराई। इधर कुछ अन्य क्षेत्रों से भी छुटपुट मजदूर के पैदल ही अपने घरों तक जाने की सूचना मिल रही है।

25 मार्च से लागू पूर्णतः लाकडाउन के बाद संभाग के अन्य क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर वर्ग के लिए परेशानी बढ़ गई है। इसी लाकडाउन के दौरान गुरुवार को लगभग 18 मजदूर का दल दोपहर तीन बजे पैदल प्रतापपुर पहुंचा। इसकी सूचना मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मित्तल, नवीन जायसवाल थाना चौक पहुंचे। वहां पर निर्मित यात्री प्रतीक्षालय में सभी को बैठाते हुए उनके भोजन की व्यवस्था की। इस दौरान चौक पर तैनात कुछ पुलिसकर्मी व राकेश मित्तल ने अपने घर से भोजन बनवाते हुए उनकी व्यवस्था की। इन मजदूर के एक ग्रुप ने बताया कि वे बिहार प्रांत के है। मनोज सिंह, सत्यनारायण कुमार, सिकंदर राम, उदय सहित आठ लोगों ने बताया कि वे अंबिकापुर में किसी ट्रांसपोर्टर के यहां ड्राइवर व खलासी का कार्य करते थे, अचानक लाकडाउन की स्थिति पर उनके ट्रांसपोर्टर ने उनकी कोई मदद नहीं की, बल्कि आधा अधूरा वेतन देते हुए भेज दिया। उन्होंने बताया कि वे 24 मार्च की रात मे अंबिकापुर से पैदल निकले है और अपने प्रांत बिहार पैदल ही जाने को मजबूर है। इस दल के साथ छोटेलाल के साथ 10 मजदूरों का एक अलग दल है जो बसंतपुर का रहने वाला है। ये लोग बरियो में बोल्डर तोड़ने का काम करते थे। वाहन नहीं होने से पैदल ही घर के लिए निकल गए है। इन दोनों दल के प्रतापपुर पहुंचने और इनकी व्यथा सुन सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मित्तल, नवीन जायसवाल ने इनको थाना चौक में ही रोकते हुए इनके भोजन की व्यवस्था की। राकेश मित्तल के साथ कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने घर मे भोजन बनाने की व्यवस्था करते हुए भोजन कराया। इस दौरान आगे भेजने के लिए राकेश मित्तल ने स्थानीय प्रशासन से भी उचित पहल के साथ हाथी वाहन को भेजने का सुझाव भी रखा, परंतु इसकी व्यवस्था नहीं हो पाने से इन मजदूरों को पैदल ही वाड्रफनगर की ओर जाना पड़ा। इसके अलावा आसपास क्षेत्र से भी छुटपुट मजदूरों के पैदल अपने घर जाने की जानकारी मिल रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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