नई दिल्ली, माला दीक्षित। राजधानी नई दिल्‍ली की अदालतों में बेहतर कामकाज होता है। एक सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

संस्था विधि सेंटर फार लीगल पालिसी की ओर से देश भर की 665 जिला अदालतों में उपलब्ध बुनियादी ढांचागत संसाधनों पर सर्वे किया गया। 6650 मुकदमेदारों से बात के बाद चौकाने वाले आंकड़े सामने आये हैें।

देश भर की 665 जिला अदालतों का मुकदमेंदारों की निगाह से किये गए देश भर में सिर्फ 11 फीसद जिला अदालत परिसरों में सामान की स्कैनिंग की सुविधा उपलब्ध है।

जबकि अग्निशमन सुविधा 71 फीसद में और आपातकाल में निकासी के संकेतक मात्र 48 फीसद जिला अदालतों में हैं।

इन राज्‍यों में भी बेहतर हालात

सर्वे में पता चला है कि जिन राज्यों में जिला अदालतों में सबसे अच्छा कामकाज होता है और ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध हैं उनमें दिल्ली (90फीसद), केरल (84फीसद), हरियाणा (70फीसद), और हिमाचल प्रदेश (70फीसद) पर है। मणिपुर (29 फीसद) और बिहार (26फीसद) पर सबसे बुरी हालत में है।

प्रसाधन की सुविधाओं से जूझने की चुनौती

पूरे देश की 665 जिला अदालतों में से सिर्फ 40 फीसद अदालत परिसरों में पूर्ण सुसज्जित प्रसाधन कक्ष यानी शौचालय हैं। गोवा, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मिजोरम में ऐसी अदालतों की संख्या सबसे कम है जहां पूर्ण सुसज्जित प्रसाधन कक्ष उपलब्ध हैं। 100 जिला अदालत परिसरों में महिला प्रसाधन कक्ष यानी महिलाओँ के लिए अलग शौचालय हैं ही नहीं।

न्‍यायालयीन कामकाज की सुविधाएं यहां ठीक

इसके अलावा केवल 39 फीसद राज्य ऐसे हैं जहां जिला अदालत परिसर में कैंटीन, बैंक शाखा, फोटोकापी, टाइपिस्ट, नोटरी आदि जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्राथमिक उपचार सेवा, डाकघर, बैंक शाखा सबसे कम जगहों पर उपलब्ध है। इस सर्वे में जिला अदालतों में बुनियादी व्यवस्था की उपलब्धता नेशनल कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम की रिपोर्ट में बताई गई सुविधाओं के आधार पर आंकी गई है।