नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली मेट्रो परियोजना के चौथे चरण में प्राथमिकता वाले तीन गलियारों में ईपीसीए द्वारा प्रस्तावित वित्तीय योगदान बढ़ाए जाने पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए DDA को समय दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र से कहा कि चौथे चरण के छह गलियारों से संबंधित कार्य के लिए मंजूरी की स्थिति के बारे में उसे बताया जाए। मामले की अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी।

दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण में 103.94 किलोमीटर लंबी रेल लाइन में छह गलियारे-एयरोसिटी से तुगलकाबाद, इंदरलोक से इंद्रप्रस्थ, लाजपत नगर से साकेत जी ब्लाक, मुकुंदपुर से मौजपुर, जनकपुरी वेस्ट से आरके आश्रम और रिठाला से बवाना और नरेला-होंगे। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने इस साल नौ मार्च को 61.66 किलोमीटर, तीन प्राथमिकता वाले गलियारों-एयरोसिटी से तुगलकाबाद, आरके आश्रम से जनकपुरी (पश्चिम) और मुकुंदपुर से मौजपुर को 24,948.65 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी थी।

DDA के वकील ने पीठ से उस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए समय मांगा, जिसमें पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने सुझाव दिया है कि DDA को चौथे चरण के छह गलियारों के लिए स्वीकृत राशि 5,000 करोड़ रुपये में से तीन प्राथमिकता वाले गलियारों के लिए 2,500 करोड़ रुपये देने को कहा जा सकता है। इस पर DDA के वकील ने पीठ से कहा, 'हमें दो दिन का समय दिया जाए। यह वित्त का मामला है।'

ईपीसीए ने शीर्ष अदालत में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि DDA ने छह गलियारों के लिए 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति जताई है और पहले तीन गलियारों के लिए उसके योगदान को आंशिक या पूरी तरह से बढ़ाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई को मेट्रो के चौथे चरण में एक सौ किलोमीटर से अधिक लंबे नेटवर्क के निर्माण का काम शुरू करने का आदेश दिया।

न्यायमित्र, केंद्र और दिल्ली सरकार अपना प्रस्ताव सौंपे : प्रदूषण के मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि चौथे चरण में प्राथमिकता वाले तीन गलियारे हैं। केंद्र पहले ही सभी छह गलियारों के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका था। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी को छह गलियारों के लिए स्वीकृति की स्थिति के बारे में सुनवाई की अगली तारीख पर स्पष्ट करने को कहा। पीठ ने इस मामले में न्यायमित्र, केंद्र और दिल्ली सरकार से अपना प्रस्ताव पत्र सौंपने को कहा है।

Posted By: Arvind Dubey

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