नई दिल्ली। दिल्ली सहित एनसीआर के सभी प्रमुख शहरों का एयर इंडेक्स खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया, जो एक-दो दिनों में और बढ़ेगा। इस बीच केंद्र सरकार की एजेंसी सफर इंडिया ने दिल्ली एनसीआर के निवासियों को फिलहाल सुबह-शाम की सैर सहित सभी बाहरी गतिविधियां रोक देने की सलाह दी है।

मंगलवार को सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो उन्हें घुटन का अहसास हुआ। स्मॉग काफी ज्यादा था। इस सीजन में पहली बार प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। सुबह आठ बजे एयर इंडेक्स 393 था, जो दोपहर दो बजे 400 तक पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एयर बुलेटिन के अनुसार, शाम तक दिल्ली का एयर इंडेक्स 401 पहुंच गया जो न केवल इस सीजन का सबसे अधिक है बल्कि खतरनाक श्रेणी को भी दर्शाता है।

मंगलवार को दिल्ली में पीएम 10 का स्तर 465 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 2.5 का स्तर 261 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। दिल्ली ही नहीं, एनसीआर में भी हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, सेटेलाइट इमेज में जो तस्वीरें सामने आ रही हैं उसमें पिछले 24 घंटे के दौरान काफी अधिक पराली जलाई गई है। इसकी वजह से स्थिति काफी विकट हो सकती है। स्काईमेट वेदर के अनुसार, दिवाली के बाद तक यानी 10 से 12 नवंबर ऐसे ही हालात बने रहने के आसार हैं। आतिशबाजी का धुआं इसमें और अधिक इजाफा करेगा।

स्थिति अधिक बिगड़ी तो दिल्ली में निजी वाहनों पर लगेगी रोक

दिल्ली में प्रदूषण से हालात ज्यादा बिगड़े तो निजी वाहनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस संबंध में पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) के अध्यक्ष डॉ. भूरेलाल ने कहा है कि वायु प्रदूषण की आपातकालीन स्थिति पर यदि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टास्क फोर्स ने इस आशय का सुझाव दिया तो इसे निश्चित तौर पर स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को प्रदूषण के कारण मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।

डॉ. भूरेलाल ने कहा कि निजी वाहनों पर रोक लगाए जाने की सूरत में सभी को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना होगा। इसके लिए दिल्ली सरकार को सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना होगा। अगर दिल्ली में बसें कम हैं तो सरकार स्कूलों की बसें लगाए या दूसरे राज्यों से मंगाए, लेकिन, हर हाल में दिल्ली सरकार को इसकी व्यवस्था करनी होगी।

जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) में भी यह नियम है और उसी के अनुरूप इसका पालन होगा। लेकिन, हम उम्मीद कर रहे हैं कि एक से 10 नवंबर तक प्रदूषण रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बाद ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अगर परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो हम इसके लिए तैयार हैं। जनता को परेशानी से बचाने के लिए ऐसा भी किया जा सकता है कि निजी वाहनों की संख्या को कम कर दिया जाए।

इस सवाल पर कि बसों की हड़ताल और कमी के बीच सार्वजनिक परिवहन पर कैसे भरोसा किया जा सकता है? उन्होंने साफ किया कि ऑड-ईवन के समय भी दिल्ली सरकार स्कूलों की गाड़ियां लेती है और उससे काम चलाती है। मेट्रो के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं, लेकिन यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि व्यवस्था नहीं है।

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