नई दिल्ली। दुष्कर्म के एक केस की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया है कि मुंबई की तरह महिलाएं दिल्ली में सुरक्षित क्यों नहीं कर सकती हैं? मुंबई में महिलाएं बिना किसी भय के देर रात तक घूम सकती हैं तो दिल्ली में क्यों नहीं? हाई कोर्ट में वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म के बाद दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही थी।

जस्टिस जीएस सिस्तानी और जस्टिस ज्योति सिह की पीठ ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहां सर्वश्रेष्ठ संसाधन और अनुभवी अधिकारी हैं तो फिर गड़बड़ी कहां हो रही है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सरकार को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को महिलाओं के लिए अपराध मुक्त बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करें।

साथ ही दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वे सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक करें और इस संबंध में बनी प्लानिंग को जमीन पर उतारे। अंधेरे वाले इलाके में पहुंचने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाए और उन्हें मोटर साइकिल उपलब्ध कराई जाए। चूंकि 44 पुलिस थाने संवेदनशील हैं, ऐसे में पुलिस बल की संख्या बढ़ाई जाए और सादे वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों को लगाया जाए। कोर्ट ने साल 2012 के निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कोष का इस्तेमाल न होने पर भी सवाल उठाया। बता दें, इस फंड में रखी 3000 करोड़ की राशि इस्तेमाल नहीं हुई है।

कोर्ट ने PCR वैन में पांच पुलिसकर्मियों की तैनाती पर भी सवाल उठाया। कहा कि PCR वैन में सिर्फ एक अधिकारी होना चाहिए, क्योंकि उसकी नजरें बाहर नहीं होती। गर्मी में लू होने के कारण पुलिसकर्मी अंदर बैठते हैं और सर्दी में ठंड होने के कारण भी वह अंदर ही रहते हैं। ऐसे में एक पुलिसकर्मी की तैनाती करके हम चार पुलिसकर्मियों को सेव कर सकते हैं और इससे संख्याबल भी बढ़ेगा।

Posted By: Arvind Dubey

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