नई दिल्ली। सुनंदा पुष्कर खुदकशी मामले में आरोपित कांग्रेस नेता शशि थरूर को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ दायर याचिका मंगलवार को न्यायमूर्ति आरके गौबा ने खारिज दी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता दीपक आनंद ने जमानत देने के फैसले को चुनौती देते कहा था कि शशि थरूर ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को बायपास करके जमानत के लिए सत्र न्यायालय गए थे।

याचिका के अनुसार पुलिस ने भी याची के इस बिंदु का समर्थन किया था। याचिका में कहा गया है कि इस तरह से मजिस्ट्रेट कोर्ट में गए बगैर सीधा सत्र न्यायलय में जमानत याचिका दायर करना गलत है।

17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में हुई सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में पहले अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ था। दिल्ली पुलिस ने 1 जनवरी 2015 को हत्या का केस दर्ज किया था, लेकिन हत्या के कोई सबूत नहीं मिले थे।

फिर फोरेंसिक साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग, विशेषज्ञ की राय और तकनीकी जांच के आधार पर आईपीसी की धारा 306 यानि आत्महत्या के लिए उकसाने और 498 ए यानि प्रताड़ित करने की धाराओं के तहत शशि थरूर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

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