School Reopen : केंद्र सरकार के अनलॉक पांच के तहत देश में सिनेमा हॉल खोलने के निर्देश के बावजूद दिल्‍ली में फिलहाल ये बंद रहेंगे। उपराज्‍यपाल अनिल बैजल ने फिलहाल दिल्‍ली में सिनेमा हॉल और स्‍कूल को खोलने की अनुमति नहीं दी है। दिल्‍ली आपदा प्रबंधन ने अपनी हालिया बैठक में यह निर्णय लिया है कि दिल्‍ली में सभी पाबंदियां 31 अक्‍टूबर तक यथावत रहेंगी। इस कारण यहां स्‍कूल और सिनेमा हॉल नहीं खुलेंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एक जोन में प्रतिदिन दो साप्‍ताहिक बाजार लगाने की अनुमति दी गई है। अनलॉक- 5 में दिल्‍लीवासियों को कई और आर्थिक अन्‍य गतिविधियों में छूट मिलेगी मगर उन्‍हें निराशा मिली है। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के साथ ही अब 15 अक्टूबर के बाद स्कूलों को खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोले जाएंगे। सबसे पहले दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्राओं को बुलाया जाएगा, क्योंकि इनकी बोर्ड परीक्षाओं में अब कुछ ही महीने बचे है। बच्चों को स्कूल बुलाकर इनके प्रैक्टिकल सहित बाकी बचे कोर्स को पूरा कराया जाएगा। कोरोना संकट के चलते मार्च से ही स्कूल बंद हैं और नए सत्र में अभी तक बच्चे एक भी दिन स्कूल नहीं आए हैं।

इस बीच, इन बच्चों की पढ़ाई को लेकर स्कूल से लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं। हालांकि, स्कूलों के बंद रहने के बाद भी इन बच्चों की आनलाइन पढ़ाई जारी थी, लेकिन स्कूलों का मानना है कि बच्चों को कक्षाओं में सामने बिठाकर पढ़ाए बगैर बेहतर रिजल्ट नहीं मिल सकता है। फिलहाल स्कूलों को खोलने को लेकर केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय जैसे देश के बड़े सरकारी स्कूल संगठनों ने तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले अनलॉक-4 के दिशा-निर्देशों के बाद इन संगठनों ने 21 सितंबर से बच्चों को स्कूल बुलाने की योजना बनाई थी। लेकिन ज्यादातर अभिभावकों की असहमति के चलते योजना परवान नहीं चढ़ी।

स्कूलों को खोलने से पहले सुरक्षा को लेकर नए दिशा-निर्देशों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें तो इसे अगले हफ्ते में कभी भी जारी किया जा सकता है। वैसे भी स्कूलों को पंद्रह अक्टूबर के बाद खोलने की जिस तरह से तैयारी है, उसमें गाइडलाइन को इससे पहले ही जारी करना होगा। जो जानकारी सामने आई है, उसके तहत प्रत्येक क्लास में 12 बच्चों को ही बैठाया जाएगा।

अगला सत्र प्रभावित न हो इसलिए तय समय पर होंगी बोर्ड परीक्षाएं

स्कूल खोलने के साथ ही सीबीएसई के साथ मिलकर शिक्षा मंत्रालय बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में भी जुट गया है। फिलहाल जो योजना है, उसके तहत दसवीं और बारहवीं की सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं हर साल की तरह अगले साल फरवरी और मार्च में होगी। हालांकि इससे पहले प्री-बोर्ड की पहली परीक्षाएं इस साल दिसंबर में ही कराई जाएंगी। योजना पर काम कर रहे अधिकारियों की मानें तो अगला शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो, इसके लिए परीक्षाएं समय पर ही कराई जाएंगी।

यहां 31 अक्टूबर तक देना होगी सरकारी व निजी स्कूलों को नामांकन की जानकारी

मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं-बारहवीं परीक्षा में वे ही विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके स्कूल 31 अक्टूबर तक ऑनलाइन जानकारी देंगे। इस संबंध में सचिव माशिमं ने गुरुवार को निर्देश जारी कर दिए है। मंडल जारी निर्देश में कहा गया है कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार स्कूलों में नियमित विद्यार्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया 30 सितंबर तक निर्धारित की गई थी। अब स्कूल में प्रवेशित नियमित प्रत्येक विद्यार्थी की नामांकन की जानकारी मंडल की वेबसाइट पर 31 अक्टूबर तक ऑनलाइन दर्ज कराना सुनिश्चित करें। मंडल की परीक्षा के लिए केवल वही विद्यार्थी आवेदन कर सकेगा, जिसका विद्यालय द्वारा ऑनलाइन नामांकन कराया गया है। ऑनलाइन जानकारी दर्ज कराने में परेशानी आने पर हेल्पलाइन नंबर 1800233175 पर संपर्क कर सकते है।

उत्‍तर प्रदेश में 15 अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे स्कूल व कोचिंग संस्थान

15 अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से स्कूल व कोचिंग संस्थानों को खोले जाने के निर्देश देने के बाद शिक्षण संस्थानों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि शिक्षण संस्थाओं को खाेलने से पहले कोरोना संक्रमण को लेकर शहर की स्थिति को देखते हुए और स्कूल प्रबंधन से बात करने तथा अभिभावक से अनुमति आदि बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही स्थानीय जिला प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा। शिक्षण संस्थाओं को स्कूल व कोचिंग खोलने के दौरान प्रदेश सरकार की गाइड का हर हाल में पालन सुनिश्चित कराना होगा। कोविड-19 के कारण पिछले सात माह से स्कूल व कोचिंग बंद चल रहे हैं। ऐसे में यदि पंद्रह अक्टूबर को शिक्षण संस्थान खुलेंगे तो जहां एक बार फिर लंबे अर्से बाद यहां रौनक लौटेगी वहीं कोरोनाकाल के दौरान फिजिकल डिस्टेंसिंग के बीच शिक्षण संस्थानों काे संचालित करना व कोविड-19 गाइड लाइन का पालन करना बड़ी चुनौती होगी।

सीनियर सेक्शन के बच्चों की कक्षाएं चलाने की तैयारी हमलोगों ने पहले से ही कर रखी है। अभिभावक की अनुमति व शासन का दिशा-निर्देश का पालन करते हुए पहले कक्षा-9 से 12 तक के बच्चों को स्कूल बुलाया जाएगा। इसके बाद स्थिति सामान्य होने पर नीचे की कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

- अजय शाही, अध्यक्ष, गोरखपुर स्कूल एसोसिएशन

स्कूल शिक्षा का विकल्प नहीं है ऑनलाइन शिक्षा, सामने आ रहे नकारात्मक प्रभाव

ऑनलाइन शिक्षा एक आपातकालीन विकल्प है, लेकिन यह स्कूली शिक्षा से बेहतर नहीं हो सकता है। ऑनलाइन शिक्षा से बच्चे सायबर खतरों के शिकार हो रहे हैं, इसलिए शासन को शिक्षाविदों और शिक्षकों के साथ परामर्श कर इसके प्रभावशाली विकल्प तलाशना चाहिए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों एवं गरीब परिवारों के सभी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा का ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा है। यह बात बाल आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान ने कोरोना काल में शिक्षा के सवाल विषय पर आयोजित वेबिनार में कही। इसका आयोजन निवसीड बचपन और बाल पंचायत के तत्वाधान में आयोजित वेबीनार में कही।

उन्होंने माना कि ऑनलाइन शिक्षा व्यवहारिक नहीं है और कहा कि यदि अन्य बेहतर विकल्प मिलता है तो उस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने सभी से ऑनलाइन शिक्षा के विकल्प सुझाने का आग्रह किया। इस दौरान शिक्षक घनश्याम तिवारी और बाल पंचायत की उपाध्यक्ष तान्या जाटव उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन निहारिका पंसोरिया ने किया।

वेबीनार में निवसीड बचपन के सत्येंद्र पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन के बीच बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास की शुरुआत हुई, लेकिन शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की ट्रेनिंग नहीं की और क्लास शुरू कर दी। इससे बच्चों और शिक्षकों को काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं। इससे अनेक बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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