नई दिल्ली। देश इस वक्त कोरना महामारी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। ऐसे में एक दूसरे की मदद के लिए खुद ब खुद हाथ आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां मकान मालिक ने एक युवक को लॉकडाउन के दौरान ही घर से भगा दिया। इसके चलते लगभग दो महीने से किशोर पार्क में रहने को मजबूर था। माता-पिता की गैर मौजूदगी में किरायेदार के बच्चों में झगड़ा हुआ तो नाराज मकान मालिक ने किराएदार युवक को डांटकर घर से भगा दिया और यह जानने की जरूरत नहीं समझी कि वह कहां गया। लगभग डेढ़ माह तक द्वारका के पार्क में गुजारा करने के बाद जब किशोर दोबारा मोबाइल नंबर लेने के लिए घर पहुंचा तो मकान मालिक ने नंबर तो दे दिया, लेकिन उसे फिर घर से फिर से भगा दिया। नतीजतन करीब दो महीने किशोर पार्क में ही रहा। इस बीच उसके माता-पिता लॉकडाउन के चलते बिहार में बेटे की चिंता में तड़पते रहे।

सोशल मीडिया पर पोस्ट हुई दास्तां

किशोर की दास्तां एक महिला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिसे पढ़कर एक IPS अधिकारी द्वारा की गई मदद से उसके माता-पिता दिल्ली पहुंचे और बेटे को ढूंढकर घर लाए। किशोर की मां के मुताबिक वह अपने पति के साथ बेटी के लिए लड़का देखने समस्तीपुर के रोसड़ा गए थे। इसी बीच लॉकडाउन हो गया। तीनों बच्चों को उन्होंने मकान मालिक के भरोसे घर पर ही छोड़ दिया था। 24 मार्च को सुबह छोटा बेटा बिस्किट के लिए रोने लगा तो बेटी बिस्किट लेने चली गई। इसी बीच दोनों बेटे झगड़ने लगे। शोर सुनकर पहुंचे मकान मालिक ने छोटे बेटे को डांटकर घर से बाहर निकाल दिया। यह बात उसे नागवार गुजरी और बिना कुछ कहे वह निकल गया। इसके बाद किशोर के भाई-बहन ने उसे काफी ढूंढा लेकिन पता नहीं लगा। आखिर में मामले की जानकारी पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस ने भी कोई मदद नहीं पहुंचाई।

पार्क के पास रहने वालों ने किशोर को खिलाया खाना

घर से निकलने के बाद किशोर द्वारका सेक्टर-7 गोकुल गार्डन में आकर बैठ गया। यहां कुत्तों के साथ खेलता और उन्हीं के साथ रहने लगा। पार्क के पास ही रहने वाली योगिता जब कुत्तों को खाना खिलाने पहुंचीं तो किशोर को भूखा देख उसे खाना खिला दिया। यह सिलसिला कई दिनों तक चला। इस बीच वह किशोर के बारे में पता लगाने की कोशिश करने लगीं। लगभग डेढ़ महीने बाद किशोर ने योगिता को पूरी कहानी बताई, साथ ही बताया कि मकान मालिक से उसे डर लगता है।

हालांकि, उनके समझाने पर किशोर मकान मालिक से पिता का मोबाइल नंबर लेकर आया और योगिता को दिया। मकान मालिक की असंवेदनशीलता की हद तो ये रही कि इस बार भी मोबाइल नंबर देने के बाद उसने किशोर को रोकने की कोशिश नहीं की और न ही उसके भाई-बहन को जानकारी दी।

इधर किशोर ने भी भाई-बहन के बारे में योगिता को कुछ नहीं बताया। योगिता ये कहानी इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दी। साथ ही सहेली स्नेहा के साथ मिलकर किशोर के माता-पिता तक पहुंचाने की कोशिश करने लगीं। स्नेहा ने बताया कि सोशल मीडिया पर ओडिशा के आइपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने किशोर के माता-पिता के वापस लौटने का खर्च उठाया। अरुण ने पटना में तैनात एसएसबी अधिकारी संजय कुमार की मदद से उन्हें पटना रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके बाद शनिवार को दिल्ली में जब ये रेलवे स्टेशन पर उतरे तो यहां एक एसएसबी जवान ने उन्हें कैब से बेटे तक पहुंचाया। बेटे को देखने के बाद मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे।

Posted By: Neeraj Vyas

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