नई दिल्ली। दिल्ली बार काउंसिल ने निर्भया गैंग-रेप और हत्या के मामले में दोषी पवन कुमार गुप्ता के वकील एपी सिंह को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब देने को कहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज दिए थे और मामले में सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल दिल्ली बार काउंसिल को निर्भया कांड के दोषियों के वकील एपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले साल 19 दिसंबर को मृत्युदंड के दोषी पवन गुप्ता के दावे को खारिज कर दिया था कि वह दिसंबर 2012 में अपराध के समय किशोर था। इसके साथ ही जाली दस्तावेज पेश करने और अदालत में सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं होने के लिए एपी सिंह के आचरण की निंदा की। उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता एपी सिंह पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार ने 19 दिसंबर को जारी किए अपने आदेश में एपी सिंह के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को मामला भेजा था, जो याचिकाकर्ता पवन कुमार गुप्ता की ओर से इस मामले में पेश हुए थे। बार काउंसिल ने कहा कि अदालत के आदेश पर अमल करते हुए सर्वसम्मति से अधिवक्ता एपी सिंह को नोटिस जारी करने का फैसला किया है। उन्हें नोटिस की प्राप्ति की तारीख से दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

उच्च न्यायालय ने अदालत में जाली हलफनामा दायर करने के लिए सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली के बार काउंसिल से कहा था। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि अपना दिमाग लगाए बिना या जानबूझकर एपी सिंह ने प्रक्रिया में देरी करने के लिए दस्तावेज पेश किए थे। पवन गुप्ता ने अब उच्च न्यायालय के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी है, जिसमें अपराध के समय उसके किशोर होने के दावे को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत इस मामले की सुनवाई 20 जनवरी को करेगी।

19 दिसंबर 2019 को एपी सिंह सुबह 10:30 बजे अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने दूसरे पक्ष को सूचित किए बिना कुछ अतिरिक्त दस्तावेजों को दाखिल करने के बहाने मामले में स्थगन की मांग की थी। न्यायाधीश ने अपने कर्मचारियों के माध्यम से फोन, एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अधिवक्ता को अदालत में पेश होने के लिए कई बार संचार किया क्योंकि मामला फिर से उठाया जाना था।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि- इसके बावजूद एपी सिंह ने फिर अदालत में आने की जहमत नहीं उठाई, जबकि मामला 2:30 बजे के बाद फिर से उठाया जाना था और न ही किसी संचार का जवाब दिया। याचिका को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने यह माना था कि दोषी के अधिवक्ता को अदालत में उपस्थित होने में कोई दिलचस्पी नहीं थी और यह इस तरह के बर्ताव की निंदा करता है। उच्च न्यायालय ने तब मामले में लेट-लतीफी करने के लिए वकील पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगया था।

दिल्ली की एक अदालत ने पिछले हफ्ते निर्भया बलात्कार मामले में चारों दोषियों- पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26), मुकेश कुमार (32) और अक्षय कुमार सिंह (31) के खिलाफ नए सिरे से डेथ वॉरेंट जारी किया है। अब एक फरवरी को सुबह 6 बजे चारों दोषियों को फांसी की सजा दी जानी है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मुकेश कुमार की दया याचिका को खारिज कर दिया था, जबकि अन्य तीन दोषियों ने अभी तक दया याचिका दायर करने के संवैधानिक उपाय का इस्तेमाल नहीं किया है।

बताते चलें कि 16-17 दिसंबर 2012 की रात को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में 23 वर्षीय एक मेडिकल छात्रा के साथ गैंग रेप करने और उसे नृशंस तरीके से मारने-पीटने के बाद सड़क किनारे फेंक दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इलाज के दौरान 29 दिसंबर को "निर्भया" ने सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। आरोपियों में से चार को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई है, जबकि एक पांचवें आरोपी राम सिंह ने कथित तौर पर मुकदमे के दौरान तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। छठवें आरोपी को सुधार घर में रखने के तीन साल बाद रिहा किया गया था क्योंकि घटना के समय वह 18 साल की उम्र से कुछ महीने कम था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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