नया वर्ष 2021 देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) बढऩे की संभावनाओं के शुभ संकेत लेकर आया है। हाल में संयुक्त राष्ट्र आॢथक एवं सामाजिक परिषद द्वारा जारी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में एफडीआइ के रुझान और परिदृश्य 2020-21 शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के प्रकोप के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन गई है। बीते दिनों उद्योग संगठन एसोचैम के समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि वर्ष 2020 में कोरोना आपदा के बीच देश में बड़े ऐतिहासिक आॢथक सुधार हुए हैं और उनसे भारत में विदेशी निवेश बढऩा लगा है। 1500 से अधिक पुराने और बेकार कानूनों को खत्म कर नए एवं सरल कानूनों तथा विभिन्न आॢथक मोर्चों पर सुधारों के दम पर निवेश के मामले में भारत को लेकर दुनिया का नजरिया बदला है। अब निवेशक 'भारत क्योंÓ की जगह 'भारत ही क्यों नहींÓ कहने लगे हैं।

नि:संदेह 2021 में भारत में एफडीआइ बढऩे का सुकूनभरा परिदृश्य दिखाई दे रहा है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) के आंकड़ों के अनुसार भारत में एफडीआइ चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान 15 प्रतिशत बढ़कर 30 अरब डॉलर हो गया। पिछले वर्ष 2019-20 में इसी अवधि के दौरान एफडीआइ 26 अरब डॉलर रहा था। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (अंकटाड) की वैश्विक निवेश रिपोर्ट-2020 के मुताबिक भारत 2019 में सबसे अधिक एफडीआइ आकॢषत करने वाले देशों की सूची में नौवें स्थान पर रहा। वर्ष 2018 में भारत इस सूची में 12वें स्थान पर था। यह बात महत्वपूर्ण है कि देश में एफडीआइ बढऩे के साथ-साथ एफडीआइ वाले क्षेत्रों का भी विस्तार होता गया है। डीपीआइआइटी के मुताबिक 2019-20 के दौरान 49.97 अरब डॉलर के कुल निवेश में से सेवा क्षेत्र में सर्वाधिक 7.85 अरब डॉलर का एफडीआइ आया।

जिन अन्य प्रमुख क्षेत्रों में एफडीआइ आया, उनमें कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में 7.67 अरब डॉलर, व्यापार क्षेत्र में 4.57 अरब डॉलर, दूरसंचार क्षेत्र में 4.44 अरब डॉलर, वाहन क्षेत्र में 2.82 अरब डॉलर, निर्माण क्षेत्र में दो अरब डॉलर और रसायन क्षेत्र में एक अरब डॉलर का एफडीआइ प्रमुख है। यदि हम देश में एफडीआइ प्रवाह की दृष्टि से विभिन्न देशों के योगदान को देखें तो पाते हैं कि वर्ष 2019-20 में सिंगापुर से सर्वाधिक 14.67 अरब डॉलर का एफडीआइ आया। यह लगातार दूसरा वित्त वर्ष है जब भारत में सर्वाधिक एफडीआइ सिंगापुर के रास्ते से आया। इसके अलावा मॉरीशस से 8.24 अरब डॉलर, नीदरलैंड से 6.5 अरब डॉलर, अमेरिका से 4.22 अरब डॉलर, केमेन द्वीप से 3.7 अरब डॉलर, जापान से 3.22 अरब डॉलर, फ्रांस से 1.89 अरब डॉलर, ब्रिटेन से 1.42 अरब डॉलर, साइप्रस से 87.9 करोड़ डॉलर और जर्मनी से 48.8 करोड़ डॉलर का एफडीआइ आया। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) और ईवाइ के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि देश में आॢथक सुधार, बाजार की क्षमता, कुशल श्रमबल और राजनीतिक स्थिरता ऐसे प्रमुख कारण हैं जो भारत को विदेशी निवेश के लिए पसंदीदा स्थान बनाते हैं।

निश्चित रूप से बीते वर्ष में कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करने के लिए ऐतिहासिक आॢथक सुधारों की बुनियाद पर आधारित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 29.87 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से जिस तरह अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है, उससे विदेशी निवेश प्रवाह बढऩे लगा है। सरकार ने पिछले छह वर्षों में उद्योग-कारोबार को आसान बनाने के लिए कई ऐतिहासिक सुधार भी किए हैं। टैक्स रिफॉर्म हुए हैं। जीएसटी लागू हुआ है। कॉरपोरेट कर में बड़ी कमी की गई है। साथ ही बड़े आयकर सुधार लागू हुए हैं। देश में आधार बायोमीट्रिक परियोजना, कृषि क्षेत्र में बुनियादी सुधार और रेलवे, बंदरगाहों तथा हवाई अड्डों के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसी विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं को लागू किया गया है। इनसे भी एफडीआइ प्रवाह बढ़ा है। प्रवासी भारतीयों को घरेलू निवेशक के रूप में अनुमति दिए जाने से भी भारत एफडीआइ के लिए और अधिक आकर्षक देश बन गया है। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने कई क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक एफडीआइ की अनुमति दी है। इसके साथ ही सरकार ने रक्षा, निर्माण क्षेत्र के विकास, बीमा, बिजली क्षेत्र, बुनियादी ढांचा, पेंशन, अन्यब वित्तीय सेवाओं, प्रसारण, नागरिक उड्डयन, फार्मास्युटिकल्स, ट्रेडिंग जैसे कई क्षेत्रों में एफडीआइ संबंधी नीतिगत सुधार लागू किए हैं। केंद्र सरकार विभिन्न श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में तब्दील करने की महत्वाकांक्षी योजना को आकार देने में सफल रही है। ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों से कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया गया है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेसÓ नीति के तहत देश में कारोबार को गति देने के लिए कई सुधार किए गए हैं। निवेश और विनिवेश के नियमों में परिवर्तन भी किए गए हैं। इनसे भी एफडीआइ बढा है। देश में तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए भी विदेशी निवेशक आकॢषत हुए हैं। देश के नवाचार में आगे बढऩे से भी एफडीआइ बढ़ा है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक 2020 में भारत चार पायदान ऊपर चढ़कर 48वें स्थान पर पहुंच गया है। कोविड-19 के कारण चीन के प्रति बढ़ती हुई नकारात्मकता और भारत की सकारात्मक छवि के कारण भी भारत में एफडीआइ प्रवाह बढ़ा है।

बहरहाल देश में एफडीआइ की संभावनाओं को और अधिक बढ़ाने के लिए जरूरी है कि वर्तमान एफडीआइ नीति को और अधिक उदार बनाया जाए। इसके लिए देश में लागू किए गए आॢथक सुधारों को तेजी से क्रियान्वित किया जाना चाहिए। अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना में व्याप्त अकुशलता को दूर करते हुए भ्रष्टाचार पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। ऐसा कर नए वर्ष में भी देश की ओर एफडीआइ का प्रवाह बढ़ाकर विकसित देश बनने की डगर पर आगे बढ़ा जा सकेगा।

(लेखक अर्थशास्त्री हैं)

Posted By: Arvind Dubey

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