सच को भले ही कितने ही पर्दों में छिपाकर रखा जाए, लेकिन एक न एक दिन वह बाहर आता ही है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंक के मामले में इस सच्चाई से पर्दा उठाया पाकिस्तानी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने। उन्होंने 29 अक्टूबर को पाकिस्तानी संसद में इस वास्तविकता को सार्वजनिक रूप से उजागर किया। चौधरी ने कहा, हमने हिंदुस्तान को घुसकर मारा और पुलवामा में जो हमारी कामयाबी है, वह इमरान खान के नेतृत्व में कौम की कामयाबी है। बाद में चौधरी ने इस टिप्पणी से पल्ला झाडऩे के तमाम प्रयास किए, लेकिन तथ्य यही है कि उन्होंने अपने देश की संसद में इन शब्दों का इस्तेमाल किया। चौधरी और पाकिस्तान इससे पीछा छुड़ाने के चाहे जितने जतन कर लें, लेकिन वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकते।

गत वर्ष 14 फरवरी को पुलवामा में जबरदस्त आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था। जैश-ए-मुहम्मद द्वारा अंजाम दिए गए इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के 40 जवान बलिदान हुए। भारत ने इस जघन्य अपराध के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया। वह इससे इन्कार करता रहा। अब पाकिस्तानी मंत्री ने खुद ही भारतीय दावे की पुष्टि कर दी है। पाकिस्तान भले ही आतंकवाद में अपनी सहभागिता को नकारता रहे, परंतु तमाम देश उसे इसी दृष्टि से देखते हैं कि वह अपने रणनीतिक हितों की पूॢत के लिए आतंकवाद को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। वास्तव में फवाद चौधरी के बयान से तो पूरी दुनिया को यह विश्वास दिलाया जा सकता है कि पाकिस्तान एक आतंकी देश है। सामरिक मामलों के तमाम जानकार अभी तक यही मानते आए हैं कि केवल पाकिस्तानी फौज और उसकी कुख्यात खुफिया एजेंसी ही आतंकवाद को शह देती हैं। चौधरी के बयान से यह पर्दाफाश भी हो गया कि पाकिस्तानी सरकार भी आतंक को बढ़ावा देने में बराबर रूप से सक्रिय है। भारतीय राजनयिक यह अवश्य सुनिश्चित करें कि चौधरी की स्वीकारोक्ति का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से प्रसार हो।

पाकिस्तानी संसद में फवाद चौधरी का उक्त भाषण सांसद अयाज सादिक के इस खुलासे के बाद हुआ कि पाकिस्तान ने विंग कमांडर अभिनंदन को इसलिए रिहा किया, क्योंकि पाकिस्तानी नेता भारत के संभावित हमले से डरे हुए थे। याद रहे कि पुलवामा आतंकी हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में आतंकी शिविरों पर हवाई हमला किया था। उसके अगले दिन ही पाकिस्तानी विमानों के साथ टकराव में अभिनंदन पाकिस्तानी सीमा में चले गए थे। हालांकि उससे पहले वह एक पाकिस्तानी विमान को नेस्तनाबूद कर चुके थे। हमें अयाज सादिक के बयान को बहुत गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि वह नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के वरिष्ठ नेता हैं। वह 20 वर्षों से सांसद हैं और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर भी रह चुके हैं। उनकी अहमियत को देखते हुए मैं उनके बयान को हूबहू यहां उसी रूप में पेश कर रहा हूं। सादिक ने कहा,.. और अभिनंदन की बात करते हैं। मुझे याद है कि शाह महमूद कुरैशी साहब उस मीटिंग में थे जिसमें पीएम साहिब ने आने से इन्कार कर दिया और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ तशरीफ लाए, पैर कांप रहे थे, पसीने माथे पे थे। हमसे फॉरेन मिनिस्टर साहिब शाह महमूद ने कहा कि खुदा के वास्ते अब इसको वापस जाने दें, क्योंकि नौ बजे रात को हिंदुस्तान पाकिस्तान पर अटैक कर रहा है।

हालांकि पाकिस्तानी सरकार और खुद अयाज सादिक ने स्पष्ट किया कि पैर कांपने वाला बयान सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा के लिए नहीं, बल्कि कुरैशी के लिए था, लेकिन सादिक का वीडियो देखकर कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता है कि वह वास्तव में बाजवा के बारे में ही बात कर रहे थे। स्वाभाविक है कि सेना प्रमुख के बारे में ऐसा रहस्योद्घाटन सेना को कतई स्वीकार्य नहीं, क्योंकि इससे सेना की वह छवि खंडित हो जाएगी जो उसने जनता के बीच बड़े एहतियात से गढ़ी है। यह छवि बिगडऩे से सेना की प्रतिष्ठा पर चोट पहुंची। इसलिए तमाम लीपापोती की गई। इसके बाद भी जो नुकसान होना था, वह तो हो ही गया, क्योंकि इससे यही स्थापित हुआ कि पाकिस्तान ने भारतीय हमले और तनाव बढऩे से डरकर ही अभिनंदन को रिहा किया। पाकिस्तानी सेना ने इस प्रकरण पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि सादिक के बयान से राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले को सियासत में घसीटा गया। उसने पुलवामा हमले से लेकर अभिनंदन प्रकरण पर पाकिस्तान के वही घिसे-पिटे राग को फिर से अलापा, लेकिन सादिक की टिप्पणी के बाद इस कवायद ने सेना को उपहास का ही पात्र बना दिया। यदि पाकिस्तानी जनता तथ्यों पर यकीन करेगी तो सेना की प्रतिष्ठा पर अवश्य आंच आएगी।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश के विपक्षी दलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा बोलने का आरोप लगा रहे हैं। इसमें संदेह नहीं कि विपक्षी दलों की छवि पर प्रहार करने के मकसद से ही उन्होंने यह कहा, लेकिन क्या वह इसमें सफल रहेंगे, क्योंकि सादिक ने कहा कि वह अपने बयान पर अडिग हैं। सरदार पटेल की स्मृति में राष्ट्रीय एकता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इन पाकिस्तानी बयानों का भी उल्लेख किया। इनका भारतीय सामरिक सिद्धांत के लिए भी गहरा निहितार्थ है, क्योंकि इससे यही संकेत मिलता है कि अपने तमाम दुस्साहस के बावजूद पाकिस्तान असल में भारतीय सेना के सख्त कदमों से खौफ खाता है। इससे स्पष्ट है कि सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट हमले ने पाकिस्तान पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।

पाकिस्तान से ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि वह कïट्टरपंथी सोच की गर्त में डूबता जा रहा है। यह केवल लश्कर और जैश जैसी हिंसक तंजीमों ही नहीं, बल्कि खुद सरकार के स्तर पर भी दिख रहा है। यह तब स्पष्ट तौर पर जाहिर हुआ, जब फ्रांस में आतंकी हमले को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बयान पर तुर्की की तल्ख बयानबाजी के पक्ष में इमरान ने भी अपनी बेसुरी तान छेड़ी। इमरान ने मैक्रों पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगाया। यह पूरी तरह आधारहीन ही था, क्योंकि मैक्रों इस्लाम के हिंसक स्वरूप का ही उल्लेख कर रहे थे। वास्तव में किसी भी किस्म के आतंक को जायज नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने इस सिद्धांत के पक्ष में आवाज उठाकर एकदम सही किया।

(लेखक विदेश मंत्रालय में सचिव रहे हैं)

Posted By: Arvind Dubey

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