डॉ. जयंतीलाल भंडारी, ख्यात अर्थशास्त्री, इंदौर

कोरोना से बेहाल प्रदेश की इकोनामी को संभालने वाला बजट है। नए वित्त वर्ष 2021-22 का प्रादेशिक बजट 2 लाख 41 हजार 375 करोड़ रुपये के आकार का है जबकि चालू वित्त वर्ष 2020-21 के बजट का आकार 2 लाख 5 हजार 397 करोड़ रुपये का है। नए बजट का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.5 फीसद तक रहने का अनुमान है। एक मार्च को विधानसभा में प्रस्तुत मध्य प्रदेश के वर्ष 2020-21 के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमानित किया गया है कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में विकास दर में 3.37 फीसद की कमी आई है। प्रतिव्यक्ति आय भी 4.71 फीसद कम होकर 98418 हो गई है।

औद्योगिक विकास दर में पिछले वर्ष की तुलना में 3.50 फीसद की कमी हुई है। कोरोना महामारी और लाकडाउन की वजह से चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में टैक्स कलेक्शन में पिछले वर्ष की तुलना में 8.05 फीसद की कमी आई है। स्थिति यह है कि जो मध्यप्रदेश 2004-05 से लगातार राजस्व आधिक्य वाला प्रदेश रहा है, वह 2021-22 के नए बजट में अभूतपूर्व राजकोषीय घाटे वाला दिखाई दे रहा है। ऐसे विषय प्रतिकूल आर्थिक परिदृश्य में भी वर्ष 2021-22 के प्रस्तुत इस बजट में वित्तमंत्री ने कोई नया कर नहीं लगाया है और ना ही किसी कर में कोई वृद्धि की है। वहीं पेट्रोल एवं डीजल के वैट टैक्स में भी कोई कटौती नहीं की है। यदि हम प्रदेश के नए बजट की तस्वीर देखें तो पाते हैं कि यह बजट छह प्रभावी स्तंभों पर आधारित है। इन स्तंभों में कृषि एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं टीकाकरण, उद्योगकारोबार की गतिशीलता, बुनियादी ढांचा विकास तथा शिक्षा व मानव पूंजी का निर्माण शामिल है।

नए बजट में नर्मदा एक्सप्रेस-वे और अटल प्रोग्रेसवे के रास्ते में इकोनामिक कारिडोर व इंडस्ट्रियल निवेश को बढ़ाने के प्रोत्साहन हैं। भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 2021-22 के बजट में 262 करोड़ रुपये का प्रविधान है। नए बजट में 'मेक इन मध्य प्रदेश' और मध्यप्रदेश से निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं साकार करने के साथ-साथ वोकल फार लोकल के लिए भी विशेष आवंटन है। लेकिन वित्तमंत्री बजट में विभिन्न वर्गों की कुछ और उम्मीदों और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आगे बढ़ते तो नया बजट और अधिक लाभप्रद होता। चूंकि कोविड-19 ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाया है अतएव स्कूल-कालेजों और विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित शैक्षणिक संस्थाओं के लिए भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए अधिक धन राशि सुनिश्चित की जा सकती थी। युवाओं के रोजगार के लिए और अधिक कदम उठाए जा सकते थे।

एमएसएमई को मजबूत करने के लिए अधिक प्रोत्साहन दिए जा सकते थे। नए बजट में बिजली की दरों की विसंगतियों को दूर कर मध्यप्रदेश के उद्योग-कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता था। प्रदेश को खिलौना का हब बनाने के लिए भी विशेष बजट आवंटन सुनिश्चित किया जा सकता था। बजट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कोविड-19 की चुनौतियां और अधिक न बढ़ें और बजट में निर्धारित राजस्व लक्ष्य पूरे हो जाएं।

Posted By: Prashant Pandey

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