विश्लेषण : डॉ. गौतम कोठारी (लेखक पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष हैं)

वर्ष 2021-22 का मध्यप्रदेश का वित्तीय बजट निश्चित रूप से महामारी के इस दौर में सीमित संसाधनों में असीमित वितरण का बजट कहा जा सकता है। कुल दो लाख 40 हजार करोड़ रुपये के बजट में उद्योगों को प्रदेश में निवेश प्रोत्साहन के लिए प्रत्यक्षत: जो दिया गया है, वह बीते वर्ष के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है। गत वर्ष के बजट में यह राशि 680 करोड़ रुपये थी, जो अब दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर 1437 करोड़ रुपये की गई है। दूसरी ओर सस्ती औद्योगिक भूमि व विभिन्न् अन्य छूटों के कारण निवेश प्रोत्साहन का स्वप्न साकार होने में आसानी होगी। वैसे देखा जाए तो निवेश प्रोत्साहन की मद में उद्योगों के लिए गत वर्षों का ही लगभग 1600 करोड़ रुपये बकाया है, किंतु इस वर्ष बढ़ाए गए बजट व आगे आने वाले दिनों में अनुपूरक बजटों में भी निवेश प्रोत्साहन की जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त राशि के आवंटन से इन्कार नहीं किया जा सकता।

इस बजट में औद्योगिक अधोसंरचना के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से नर्मदा एक्सप्रेस-वे है, जो आलीराजपुर से अमरकंटक तक आठ लेन में 1300 किलोमीटर की लम्बाई में बनाया जा रहा है। स्वाभाविक रूप से इसका लाभ इस पूरी पट्टी के उद्योगों को मिलेगा। दूसरी ओर, प्रदेश में वर्तमान में हो रहे केंद्रीयकृत औद्योगिक विकास को पूरे प्रदेश में विस्तारित करने की योजना है। स्वाभाविक रूप से इसका लाभ भविष्य में क्षेत्रीय संभावनाओं को मिलेगा। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के लिए सरकार उत्साहित है। सरकार ने विविध सोलर पार्क के माध्यम से लगभग 4500 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना हाथ में ली है।

यह स्वागतयोग्य है। सरकार की जल जीवन मिशन योजना गांवों में नल से जल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना है। साथ ही सिंचाई के क्षेत्र में लगातार वृद्धि की दृष्टि से चिह्नित नल परियोजनाओं व माइक्रो इरीगेशन के विस्तार का लाभ इनसे संबंधित उद्योगों के लिए काफी लाभप्रद हो सकता है। वर्तमान में शासन की नीति इस क्षेत्र में नए उद्योगों को प्रोत्साहन देने की नहीं है, इसका लाभ अन्य प्रदेशों को मिल रहा है। यदि सरकार गुणवत्ता मानकों से समझौता न करते हुए नीति में जरूरी परिवर्तन करे और स्थानीय उपक्रमों के लिए राह खोले, तो निश्चय ही सिंचाई आधारित उद्योगों को अच्छा प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि सरकार ने बीते दशकभर में इस क्षेत्र में काफी-कुछ किया है, लेकिन अब भी बहुत कुछ करने की संभावनाएं हैं।

सरकार ने शिक्षा एवं कौशल उन्न्यन के क्षेत्र में इस बार काफी बजट दिया है। मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। अब बस सरकार को इससे संदर्भित विचार को जमीन पर उतारना होगा। सरकार के रुख को देखते हुए लगता है कि इस बार इन योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता विकास की दृष्टि से कार्य होगा। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश का यह वित्तीय बजट निश्चय ही प्रदेश के विकास को न केवल गति देगा वरन् रोजगार के अवसरों को व्यापक रूप से सृजित भी करेगा। यह प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है।

Posted By: Prashant Pandey

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