आशीष व्यास

विश्व के सबसे सफल निवेशकों में से एक वारेन बफेट का एक मशहूर कोट है - 'यदि आप सोते समय पैसा कमाने का कोई रास्ता नहीं खोजते हैं, तो आप मरते दम तक काम करेंगे।' निवेश और निवेशकों को बढ़ावा देने का इससे अच्छा उदाहरण दूसरा नहीं हो सकता है। यह संदर्भ केवल इसलिए कि मध्य प्रदेश इन दिनों रेड कारपेट बिछाकर निवेशकों की ही राह देख रहा है। आज से ठीक पांचवें दिन, 18 अक्टूबर को इंदौर में 'मैग्निफिसेंट एमपी' के जरिए देश-विदेश के उद्योगपति इस तैयारी-उम्मीद के साथ मध्य प्रदेश आएंगे कि वे बेहतर निवेश की संभावनाओं से सीधा साक्षात्कार कर लें। महत्वपूर्ण यह भी है कि इस बार उद्योगपति कमलनाथ खुद बतौर मुख्यमंत्री उनका स्वागत कर रहे हैं। सरकार की शुरुआती तैयारी यह भी बता रही है कि देश के नामचीन उद्योग समूह सीमेंट, पर्यटन, फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी सहित अन्य क्षेत्रों में लगभग एक लाख करोड़ रुपए का निवेश कर सकते हैं। कुछ प्रस्तावों का एलान हो सकता है और कुछ उद्योग समूह अपनी ओर से निवेश को लेकर ठोस घोषणाएं भी कर सकते हैं। इस आयोजन की एक खास बात और है। यह अब तक की राजनीतिक परंपराओं से कुछ हटकर भी है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह 'ग्लोबल समिट' के नाम से साल 2006 में शुरू हुआ था। आमतौर पर सरकार बदलने के बाद ऐसे आयोजन-प्रयोजन भी बदल जाते हैं। कांग्रेस सरकार ने भी इसका नाम बदला, तय मानक भी बदले, लेकिन प्रदेश में निवेश लाने-निवेशकों को बुलाने की परंपरा कायम रखी। व्यावसायिक जगत में इसकी सराहना हो रही है और उम्मीद भी लगाई जा रही है कि सालों बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस उद्योग जगत के लिए ऐसी उपजाऊ जमीन जरूर तैयार करेगी, जिस पर निवेश की वास्तविक फसल लहलहा सके। प्रदेश सरकार पारंपरिक के बजाय नए तौर-तरीकों से राज्य की ब्रांडिंग करने पर भी जोर दे रही है। एक दिन के मेगा-इवेंट में निवेशकों की भीड़ जुटाने की जगह, चुनिंदा औद्योगिक घरानों और निवेशकों पर ही फोकस किया जा रहा है। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम भी इस बार प्रयास में है कि निवेशकों को ऑनलाइन सारी जानकारियां उपलब्ध रहें। पिछली इन्वेस्टर्स मीट की गलतियों का दोहराव न हो, इसलिए उद्योगों को जमीन देने के लिए लैंड-बैंक भी पहले से ही तैयार करवा लिया गया है। आवंटन के लिए ऑनलाइन बुकिंग की भी व्यवस्था कर ली गई है।

अब सिक्के का दूसरा पहलू

राज्यों में निवेश की संभावनाओं को परखने के लिए 56 साल पुरानी एक संस्था है - नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर)। पहली बार वर्ष 2015 में इसने प्रत्येक राज्य में निवेश की क्षमता स्टेट इन्वेस्टमेंट पोटेंशियल इंडेक्स (एसआईपीआई) को मापना शुरू किया था। संस्था छह तय मानकों पर शोध करती है। इस आधार पर पिछले चार सालों से देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की रेटिंग जारी भी की जा रही है। यह रेटिंग जमीन की उपलब्धता, श्रमिक, आधारभूत संरचना, आर्थिक माहौल, राजनीतिक स्थिरता व सुशासन पर आधारित है। फिलहाल चिंताजनक तथ्य यह है कि 2018 की ताजा रिपोर्ट में चयनित टॉप-10 राज्यों में मध्य प्रदेश नहीं है। यही नहीं, मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता 2017 के मुकाबले 2018 में तीन पायदान नीचे भी गिर गई है। प्रदेश दसवें से अब 13वें स्थान पर आ गया है। निवेश के लिए फिलहाल दिल्ली सबसे बेहतर है। दिल्ली पिछले साल की तुलना में एक रैंक ऊपर भी आया है। दूसरे स्थान पर तमिलनाडु है, इस राज्य ने अपनी नीतियों में सुधार कर चार पायदान की छलांग लगाई है। तीसरे नंबर पर गुजरात है, हालांकि यह दो पायदान नीचे आया है, बावजूद इसके निवेशकों की पसंद में शामिल है। इसके बाद क्रमश: हरियाणा, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बंगाल, राजस्थान और पंजाब हैं। स्वाभाविक है-इन सभी राज्यों में निवेश की क्षमता मध्य प्रदेश से ज्यादा आंकी जा रही है और यह भी कि इन राज्यों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी तत्परता-गंभीरता से काम किया जाता है। यदि मध्य प्रदेश को सर्वे की सभी कसौटियों पर परखें तो जमीन की उपलब्धता में हम देश में दूसरे नंबर पर है। एक अच्छी खबर यह भी है कि मध्य प्रदेश सुशासन और राजनीतिक स्थिरता में भी पांचवें स्थान पर है। हड़ताल के कारण देशभर में सबसे कम नुकसान मध्य प्रदेश में ही हुआ है। बिजली की उपलब्धता भी 100 प्रतिशत है। देशी-विदेशी निवेशक अपने साथ इस प्रकार के तुलनात्मक आंकड़े लेकर ही आएंगे। क्योंकि, यही वह संदर्भ होगा, जिसके आधार पर उनका योगदान सुनिश्चित होगा। चूंकि, मसला व्यापार, बाजार और निवेश का है, स्पष्ट है भाव-ताव, तौल-मोल कर ही निवेश किए जाएंगे। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के खाते में दर्ज खामियों पर भी बात होनी चाहिए। जमीन तो उपलब्ध है लेकिन कुशल श्रमिक और जनसंख्या के अनुपात में बैंक शाखाएं कम हैं। प्रदेश के पास गुजरात, महाराष्ट्र की तरह बंदरगाह नहीं हैं, इसलिए संपर्क भी अन्य राज्यों की तुलना में कमजोर है। गंभीरता से यह भी सोचा जाना चाहिए कि अब तक हुए सर्वे में जो फीडबैक मिला है, उसमें 50 प्रतिशत निवेशक ही संतुष्ट हैं। शेष 50 फीसदी को इन कमियों के साथ ही लुभाना होगा।

शासन और प्रशासन की शीर्ष पंक्ति भी इस धारणा को स्वीकार करती है, तभी संभावनाओं वाले कुछ नए सेक्टर भी जोड़े गए हैं। पिछली बार कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, रक्षा, आईटी, वैकल्पिक ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल्स, पर्यटन और अरबन डेवलपमेंट पर फोकस किया गया था। इस बार लॉजिस्टिक व वेयरहाउस और आईटी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के साथ डाटा बेस को जोड़ते हुए पर्यटन पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है। निवेश के लिए जिन राज्यों से मध्य प्रदेश की तुलना होगी, वे हैं - दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र। यदि इन राज्यों की ताकत को परखें तो जो तथ्य सामने आते हैं, वे हैं - सभी राज्यों ने अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए अपनी पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इससे जिम्मेदारी और जवाबदेही तो बढ़ी ही है, साथ ही गैर-जरूरी देरी के साथ भ्रष्टाचार भी कम हुआ है। यदि दिल्ली की बात करें तो वहां आधारभूत संरचना बेहतर है, इसी के साथ कुशल श्रमिकों की संख्या भी संतोषजनक है। निवेशक दिल्ली को राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से भी बेहतर मानते हैं। ठीक इसी प्रकार तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिरता के साथ सुशासन की श्रेणी को सम्मानजनक स्थान मिलता है। सफलता के गुजरात मॉडल में कार्गो का कंप्यूटरीकरण और बेहतर बिजली व्यवस्था को पसंद किया जाता है। महाराष्ट्र में जमीन की उपलब्धता अच्छी है, यह राज्य भी बड़े शहरों और स्मार्ट सिटी की ज्यादा संख्या से निवेशकों की निजी रुचि का विषय बना हुआ है।

बहरहाल, मध्य प्रदेश सरकार का प्रचार-प्रसार बताता है कि सरकार इस बार 'भरोसे' की बात कर रही है। बतौर मुखिया कमलनाथ ने भी यह विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि यहां पारदर्शी व्यवस्था, आसान शर्तें, असीमित संसाधन और सामाजिक समरसता है। उन्होंने वादा भी किया है कि निवेश के लिए तैयार मध्य प्रदेश के पास 1 लाख 20 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि, 48 हजार एकड़ विकसित औद्योगिक क्षेत्र, उद्योगों के लिए 900 एमक्यूबी जल और 23 हजार से ज्यादा मेगावॉट बिजली है। इसी के साथ प्रतिवर्ष दो लाख कुशल कर्मचारी उपलब्ध कराने का दावा भी किया जा रहा है।

प्रगति की गति बढ़ाने और विकास को नए पैमाने पर पहुंचाने में जुटे प्रदेश के लिए वैश्विक मंदी की चर्चा भी कुछ चिंता बढ़ा सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए वे तीन बातें महत्वपूर्ण हो सकती हैं, जो इन दिनों कॉर्पोरेट ब्लॉगर्स की ओर से लगातार कही जा रही हैं।

बाजार समय के साथ वापस आ जाते हैं!

चाहे वे चरम आशावाद या निराशावाद का सामना करते हों, बाजार समय के साथ अपने स्तर पर वापस आ जाते हैं। व्यक्तिगत निवेशकों के लिए संकेत स्पष्ट है - एक योजना बनाएं और उसके साथ ही बने रहें। बाजार की रोजमर्रा की उथल-पुथल के साथ बने रहें, चलते रहें।

अतिरिक्त कभी भी स्थायी नहीं होते हैं!

बाजार में अचानक आया उतार-चढ़ाव कभी फायदेमंद नहीं होता। यहां तक कि सबसे सफल निवेशकों का भी मानना है कि जब माहौल उनके पक्ष में बढ़ रहा है और लाभ भी बहुत है, तो यह सच नहीं है। मध्यम बाजार ही सबसे अच्छा है।

हर ट्रेड के साथ एक ट्रेडिंग प्लान हो!

मंदी की चर्चाओं से डरकर कदम पीछे हटा लेना, सफल निवेश का सबसे बड़ा दुश्मन है। ट्रेडिंग के लिए एक अनुशासित दृष्टिकोण बहुत आवश्यक है - चाहे एक दीर्घकालिक निवेशक हों या एक दिन के व्यापारी। मुनाफे के लिए महत्वपूर्ण है, हर ट्रेड के साथ एक ट्रेडिंग प्लान हो।

विश्वास की नई परंपरा स्थापित कर देश का हृदय प्रदेश आवभगत में जुटा हुआ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि निवेश और निवेशक की योजनाएं कागजी-कश्तियां नहीं बनेंगी!