मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा पेश पहले बजट की तस्वीर यह बता रही है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी द्वारा विभिन्न् वर्गों को लुभाने के लिए जो घोषणाएं की गई थीं, उन्हें पूरा करने की दिशा में कदम उठाने के साथ तमाम क्षेत्रों को लाभ देने या राहत पहुंचाने की कोशिश की गई है। कई आर्थिक-सामाजिक सुहाने सपने भी बजट में दिखाए गए हैं। प्रदेश सरकार की तमाम फ्लैगशिप योजनाओं के लिए बेहतर बजट आवंटन किया गया है।

वित्त मंत्री तरुण भनोत इस बजट में किसान और ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते नजर आए हैं और उनके द्वारा इस दिशा में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। मसलन, उन्न्त खेती के लिए सरकार किसानों को ट्रेनिंग देगी। कृषक बंधु योजना शुरू की जाएगी। मनरेगा के लिए 2500 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। बजट में बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण के लिए 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। कृषि को बढ़ावा देने के लिए कृषि सलाहकार परिषद का गठन किया जाएगा। प्रदेश में कॉर्पोरेट स्तर पर गौशाला का विकास किया जाएगा। 15 सहकारी बैंकों से किसानों को 1000 करोड़ रुपए का कर्ज दिया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड का फायदा मछुआरों को मिलेगा। पशुपालन के लिए 300 करोड़ रुपए इस बजट में रखे गए हैं। बांस के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार की इन घोषणाओं से कृषि व ग्रामीण विकास के परिदृश्य में सुधार आएगा।

यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि बजट में शिक्षित व अल्पशिक्षित/अशिक्षित युवाओं की रोजगार जरूरतों की पूर्ति हेतु कौशल-प्रशिक्षण के प्रयासों पर जोर देते हुए विशेष आवंटन किया गया है। बजट में युवाओं को कौशल विकास से लैस करने के लिए युवा स्वाभिमान योजना के तहत अलग-अलग विभागों में उपयुक्त प्रावधान किया गया है। वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने के लिए जल्द ही सरकार द्वारा कानून लाने की बात कही गई है। इसके अलावा प्रदेश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही नई स्टार्टअप नीति भी लेकर आएगी। प्रदेश की राजधानी भोपाल में छात्रों के लिए नई आधुनिक लाइब्रेरी बनाई जाएगी। मध्याह्न भोजन योजना को सशक्त किया जाएगा। निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय निवासियों के लिए 70 फीसदी आरक्षण की घोषणा से निश्चित ही प्रदेश के युवाओं को लाभ मिलेगा।

सरकार शासकीय स्कूलों की दशा भी सुधारना चाहती है, इसका पता इस बात से चलता है कि बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 24 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में तीन नए मेडिकल कॉलेज खोलने की भी घोषणा की गई है। एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के खाली पड़े पद शीघ्र ही भरे जाएंगे। योग्य चिकित्सकों की भर्ती अतिशीघ्र की जाएगी।

बजट में महिला एवं बाल विकास के लिए प्रभावी प्रावधान किया गया है। संपत्ति हस्तातंरण के मामले में महिलाओं को स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी जाएगी। इसके अलावा महिला सुरक्षा पर विशेष जोर रहेगा। महिलाओं के लिए प्रदेश में नई ई-रिक्शा योजना लाई जाएगी।

कमलनाथ सरकार के इस पहले बजट में जहां कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र, बुनियादी ढांचा विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खास जोर दिया गया है, वहीं इसमें कई और भी चमकीले बिंदु दिखाई दे रहे हैं। इस बजट में प्रदेश में जल संरक्षण पर भी फोकस किया गया। इसके लिए राइट टू वाटर स्कीम लाने की घोषणा हुई है। इंदौर की कान्ह नदी सहित 40 नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए योजना शुरू करने की बात बजट में कही गई है। जबलपुर में रिवर फ्रंट बनाया जाएगा। स्वास्थ्य का अधिकार लागू किया जाएगा। खान-पान के क्षेत्र में प्रदेश की विशिष्टता को दुनिया में नई पहचान दिलाने की बात भी कही गई है। वित्त मंत्री की यह घोषणा निश्चित ही उत्साहजनक है कि प्रदेश की प्रसिद्ध जलेबी, बर्फी, लड्डू, मावा बाटी और नमकीन की ब्रांडिंग की जाएगी।

बजट के माध्यम से उद्योग-कारोबार से जुड़े लोगों को भी राहत देने की कोशिश की गई है। सरकार ने उद्योग-कारोबार की गतिशीलता बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान किए हैं। सरकार नई एमएसएमई यूनिट शुरू कर रही है। इसके लिए 17 हजार लोगों को ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है।

वित्त मंत्री तरुण भनोत के समक्ष इस बजट में जहां एक ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा समय-समय पर की गई विभिन्न् घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के साथ विभिन्न् वर्गों की अपेक्षाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती थी, वहीं दूसरी ओर 38 हजार करोड़ रुपए की किसान कर्जमाफी के साथ-साथ प्रदेश सरकार के सिर पर 1.82 लाख करोड़ रुपए कर्ज की गठरी भी थी।

यही कारण है कि वित्त मंत्री बजट में प्रदेश की उन बड़ी जरूरतों की पूर्ति नहीं कर पाए, जिनके बारे में 9 जुलाई को जारी प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया था। यद्यपि पिछले वर्ष की तुलना में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 9.71 फीसदी बढ़ी है, लेकिन गरीबी के मामले में देश के 29 राज्यों में हम 27वें पायदान पर हैं। 2018-19 में प्रदेश की सालाना प्रति व्यक्ति आय 90,998 रुपए हो गई, जो इससे पहले के साल में 82,941 रुपए थी। सर्वेक्षण में प्रदेश में शिक्षा और पोषण की स्थिति भी बदतर बताई गई है। सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में गरीबी राष्ट्रीय औसत से करीब 10 फीसदी ज्यादा है। इसका राष्ट्रीय औसत 21.92 फीसदी है, जबकि प्रदेश में 31.65 फीसदी है। प्रदेश की साढ़े सात करोड़ आबादी में से 23.4 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। प्रदेश के सिर्फ 23 फीसदी घरों में नल से जल की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में यह बजट इन सब आर्थिक-सामाजिक चुनौतियों के लिए बहुत कुछ राहत पहुंचाते नहीं दिखाई दे रहा है।

बजट में उद्योग-कारोबार और निर्यात वृद्धि के लिए भी पर्याप्त बजट आवंटन नहीं है। बजट में दतिया, रीवा और उज्जैन में हवाई सेवा, भोपाल, जबलपुर तथा इंदौर में मेट्रो रेल, राइट टू हेल्थ, फूड प्रोसेसिंग जैसे बड़े स्वप्निल लक्ष्यों के लिए आवंटन बहुत छोटी-छोटी राशियां लिए हुए है।

बजट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदेश सरकार बजट योजनाओं का क्रियान्वयन किस तरह करती है और अतिरिक्त संसाधन कैसे जुटाती है। चूंकि सरकार के पास आमदनी के सीमित संसाधन हैं और बजट में जो योजनाएं घोषित हुई हैं, उनके क्रियान्वयन में बजट अनुमान से अधिक व्यय की आशंका स्पष्ट दिखाई दे रही है। ऐसे में वित्तीय घाटा बढ़ने की चुनौती भी साफ नजर आ रही है। अतएव कहना होगा कि बजट योजनाओं के उपयुक्त क्रियान्वयन और कुशल वित्तीय नियंत्रण से ही प्रदेश के विकास को गति मिल सकेगी, वहीं दूसरी ओर आम आदमी के चेहरे पर भी मुस्कराहट आ सकेगी।

(लेखक अर्थशास्त्री हैं)