देखा जाए तो ऑटो के पीछे विज्ञापन लगाकर पार्टी के विचारों और कार्यक्रमों के प्रचार का तरीका नया तो नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि इसको ज्यादा से ज्यादा प्रचलन में लाने का काम 'आम आदमी पार्टी" ने ही किया है, जो बेहद असरदार भी साबित हुआ है।

यही कारण है कि हमारी देखादेखी बाद में अन्य पार्टियों ने भी प्रचार के इस तरीके को अपनाया। दरअसल 'आम आदमी पार्टी" के पास अन्य तरीकों से प्रचार करने के लिए पर्याप्त तौर पर फंड नहीं है।

हालांकि ऑटो के पीछे विज्ञापन लगाकर प्रचार करना भी कोई कम खर्चीला काम नहीं है, लेकिन हमारी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारे संघर्ष को देखते हुए ऑटो वालों ने बगैर कोई पैसा लिए हमें अपनी पार्टी के पोस्टर अपने ऑटो के पिछले हिस्से पर लगाने की अनुमति दे दी।

इसके बाद हमारी पार्टी ने प्रचार के लिए ह्यूमन बैनर का सहारा लिया, जिसके लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर मेहनत की। प्रचार के इन दोनों ही तरीकों पर पार्टी को बस प्रिंटिंग का खर्चा ही देना पड़ा, जिससे कम लागत में ही ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पार्टी का संदेश पहुंचता रहा है।

अब चूंकि चुनाव आयोग ने उक्त दोनों ही तरीकों पर प्रतिबंध लगा दिया है, तो हमारी पार्टी के पास जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एसएमएस व ऑडियो कॉल्स का तरीका बचा है। साथ ही पेम्पलेट आदि पुराने तरीके भी बचे हैं। अब हमारी पार्टी ऐसा तरीका अपनाना चाहेगी, जिससे कम से कम खर्च में ज्यादा से ज्यादा

लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सके। कार्यकर्ताओं के जोश में कोई कमी है और हमारा प्रचार भी मंद नहीं पड़ेगा।

- दिलीप कुमार पांडेय

(सदस्य, आम आदमी पार्टी)

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