अपने देश में इंसान के बुनियादी हितों और यहां तक कि देश की प्रतिष्ठा को लेकर भी सरकारें कितनी लापरवाह रहती हैं, इसकी एक मिसाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देखने को मिली है। महीने भर के ऊपर से यहां के लोग प्रदूषण की खतरनाक समस्या का सामना कर रहे हैं। मगर यहां की अरविंद केजरीवाल सरकार ऐसे गंभीर मसले पर भी सियासी दांव खेलने में उलझी रही है। पिछले दिनों जब पड़ोसी राज्यों (कुछ खबरों के मुताबिक पड़ोसी देशों) से धुआं आकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) पर छा गया, तो विभिन्न् प्रशासनिक स्तरों पर कुछ हरकतें देखने को मिलीं। किंतु जैसे ही स्मॉग छंटा, सब निश्चिंत हो गए। जबकि स्मॉग प्रदूषण का सिर्फ एक पहलू है। एनसीआर की हवा में पीएम-2.5 नामक प्रदूषक तत्व की मात्रा लगातार उस स्तर पर पहुंचती रही है, जिसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक समझा जाता है। लेकिन अब इसे सामान्य बात मान लिया गया है। जबकि किसी-किसी रोज ये मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। ऐसा ही रविवार और फिर सोमवार को हुआ। नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में भारत-श्रीलंका के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच में रविवार को श्रीलंकाई खिलाड़ी मास्क पहनकर मैदान पर उतरे और उनकी शिकायत पर कुछ देर के लिए खेल भी रोकना पड़ा। मगर ये घटना नहीं होती, तो शायद ही इस तरफ किसी का ध्यान जाता कि रविवार को पीएम-2.5 की मात्रा कुछ जगहों पर 500 के करीब पहुंच गई, जबकि 151 के बाद इसे लोगों के लिए अस्वास्थ्यकर और 300 के बाद खतरनाक माना जाता है।


स्पष्टत: स्थिति लगातार विकट बनी हुई है। लेकिन इसे संभालने की कोई कार्ययोजना अब तक सामने नहीं आई है। अत: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सोमवार को नाराज दिखा, तो ये प्रतिक्रिया लाजिमी थी। एनजीटी ने पिछले 28 नवंबर को दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्यों (पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान) से प्रदूषण से निपटने की व्यापक कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरकारें खामोश बैठी रहीं। उधर अधिकारियों ने हवा की खराब गुणवत्ता के बावजूद भारत-श्रीलंका टेस्ट मैच के आयोजन को हरी झंडी दी। एनजीटी ने उचित प्रश्न उठाया कि हवा के हाल को देखते हुए क्या यह वाजिब नहीं था कि मैच नहीं होने दिया जाता? अब कोर्ट ने बुधवार तक प्रदूषण रोकने के उपायों की योजना पेश करने को कहा है। अच्छा होगा कि युद्धस्तर पर ये कार्ययोजना बनाकर ट्रिब्यूनल को सौंपी जाए। साफ है, अब बेहद कड़े कदम उठाने होंगे। उनसे सबको कुछ दिक्कतें भी हो सकती हैं। लेकिन सबको इसमें पूरा सहयोग करना होगा। एनसीआर में हालात बर्दाश्त से बाहर हैं। लेकिन कई दूसरे राज्यों में भी स्थिति असंतोषजनक है। हालिया तजुर्बे से साफ है कि हवा और पर्यावरण की कोई इलाकाई सीमा नहीं होती। इसके मद्देनजर बेहतर होगा कि केंद्र सारे देश के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने की पहल करे। आवश्यक हो, तो मुख्यमंत्रियों की आपात बैठक बुलाई जाए। अमल की शुरुआत भले एनसीआर से हो, लेकिन उन उपायों को सारे देश में लागू करना होगा।

Posted By:

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना