जेपी नड्डा का भाजपा अध्यक्ष बनना तभी तय हो गया था, जब अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद उन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। नए पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनकी विधिवत ताजपोशी से यह धारणा निराधार हुई कि गृह मंत्री बनने के बावजूद अमित शाह पार्टी की कमान अपने हाथ में ही बनाए रख सकते हैं। भाजपा ने केवल पार्टी के संविधान के अनुसार ही चलना पसंद नहीं किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि वह उन राजनीतिक दलों सरीखी नहीं है, जहां सब कुछ एक व्यक्ति या फिर परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है।

जेपी नड्डा के अध्यक्ष बनने से यह आरोप लगाने वालों को कुछ नया सोचना होगा कि इस सरकार और पार्टी में सब कुछ नरेंद्र मोदी और अमित शाह की इच्छा के अनुरूप ही होता है। इसी के साथ उन्हें इस पर भी गौर करना होगा कि बीते दो दश्ाक में जहां भाजपा ने करीब दस अध्यक्ष देखे, वहीं कांग्रेस सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा अन्य किसी को इस लायक नहीं समझ सकी कि उसे पार्टी की कमान सौंपी जा सके। हैरानी यह है कि कांग्रेस गांधी परिवार से बाहर के किसी नेता को अंतरिम अध्यक्ष बनाने पर भी विचार नहीं कर सकी।

यह भारतीय राजनीति की विडंबना ही है कि जहां भारतीय जनता पार्टी यह प्रदर्शित कर रही है कि पार्टी का एक आम कार्यकर्ता भी अध्यक्ष पद पर आसीन हो सकता है, वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस परिवारवाद से इस कदर चिपकी हुई है कि सोनिया गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद बेटे राहुल गांधी ने पार्टी की कमान संभाली और उनके पद छोड़ने के बाद फिर से मां ने अंतरिम अध्यक्ष बनना जरूरी समझा। आखिर इसे लोकतांत्रिक तौर-तरीकों के अनुरूप कैसे कहा जा सकता है?

मुश्किल यह है कि परिवारवाद से अन्य अनेक दल भी जकड़े हुए हैं। क्षेत्रीय दल तो एक तरह से परिवारवाद का पर्याय ही बन गए हैं। इस पर आश्चर्य नहीं कि जेपी नड्डा को पार्टी की कमान सौंपते समय गृह मंत्री अमित शाह ने यह रेखांकित किया कि हम वंशवाद के आधार पर चलने वाले दल नहीं हैं। इसी के साथ उन्होंने यह अपेक्षा व्यक्त की कि नड्डा पार्टी को नए मुकाम पर ले जाएंगे। वास्तव में जेपी नड्डा के सामने वैसी राजनीतिक सफलता हासिल करना एक बड़ी चुनौती है, जैसी अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष के रूप में हासिल की और पार्टी का व्यापक विस्तार कर उसे एक मजबूत दल के रूप में स्थापित किया। जेपी नड्डा को विस्तार के इस सिलसिले को कायम रखना होगा। यह तभी कायम हो सकता है कि जब आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा उल्लेखनीय सफलता हासिल करे।

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