डोकलाम विवाद का बातचीत से सर्वमान्य हल निकालने की भारत की पेशकश की चीन लगातार अवहेलना कर रहा है। उसका रुख लगातार हमलावर हो रहा है। 16 जून को भूटान के आग्रह पर भारतीय फौज के डोकलाम क्षेत्र में पहुंचने के बाद से चीन की आक्रमकताएं जुबानी तौर पर जाहिर हो रही थीं। लेकिन पिछले मंगलवार को नया मोर्चा खोलते हुए चीनी सैनिकों ने लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय जवानों से उन्होंने हाथापाई भी की। अपनी बदजुबानी को गुरुवार को चीन नए स्तर पर ले गया, जबकि उसके सरकारी अखबार (ग्लोबल टाइम्स) ने कहा कि भारत छोटी सोच वाला देश है, जो मानता है कि सरहद पर एक सड़क दोनों देशों की रणनीतिक हैसियत को तय कर सकती है। इसी अखबार में चीन के अस्त्र नियंत्रण एवं निरस्त्रीकरण संघ के प्रमुख रियर एडमिरल (रिटायर्ड) शु गुआंग्यू का बयान छपा है, जिसमें संभावना जताई गई है कि सितंबर शुरू होने के पहले ही चीन भारत को डोकलाम से अपनी सेना हटाने के लिए अल्टीमेटम देगा। इसकी अनदेखी हुई तो चीन के पास भारत को पीछे धकेलने के कई कई रास्ते हैं।


इस मुद्दे पर बातचीत करने के भारत के प्रस्ताव को चीन लगातार ठुकरा रहा है। जाहिर है कि चीन युद्ध की मुद्रा में है। इससे विश्व स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है। बुधवार को अमेरिका ने इस विवाद पर फिर टिप्पणी की। उसके विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन को बातचीत से ये विवाद सुलझाना चाहिए। ये बयान उसी रोज आया, जब प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा कि 30 साल में पहली बार भारत और चीन के बीच जंग का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस अखबार ने विश्व को आगाह किया दोनों ही देशों के पास परमाणु हथियार हैं। इस संदर्भ में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की टिप्पणी महत्वपूर्ण है कि भारत और चीन दोनों में कोई भी एक-दूसरे के खिलाफ जंग में निर्णायक जीत हासिल करने की स्थिति में नहीं है। इस सच्चाई के बावजूद चीन युद्धोन्माद पर रास्ते पर चल रहा है, तो यही कहा जा सकता है कि वहां के नेताओं ने अपना विवेक खो दिया है। इसके मद्देनजर भारत ने उचित ही सीमा पर अपनी सुरक्षा चाक-चौबंद करने के पुख्ता उपाय किए हैं। वहां सुरक्षा बलों की नई टुकड़ियां भेजी गई हैं।


बहरहाल, हिफाजत में बिना कोई कोताही बरते शांतिप्रियता की अपनी नीति के तहत मसले का बातचीत से हल निकालने की भरसक कोशिश भारत को करते रहना चाहिए। लेकिन युद्ध टालने की शर्त यह नहीं हो सकती कि भारत अपनी सेना को एकतरफा तौर पर डोकलाम से हटा ले। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि इस मुद्दे पर विश्व के अधिकांश देशों का समर्थन भारत के साथ है। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए एनडीए सरकार को शांतिपूर्ण समाधान को स्वीकार करने के लिए चीन पर दबाव बढ़ाना चाहिए। फिर भी चीन नहीं माना, तो सरकार जो भी निर्णय लेगी, सारा देश उसके साथ खड़ा होगा।

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