लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीनी फौज की घुसपैठ की खबरें तो पहले भी आती थीं, लेकिन हाल के वर्षों में उत्तराखंड चीन का अपेक्षाकृत नया निशाना बना है। इस दौरान चीनी फौजों ने इस इलाके में भारतीय सीमा का कई बार उल्लंघन किया। बीती 19 जुलाई को ऐसी घटना फिर हुई। इस बार चीनी फौजी कितने अंदर तक आए और कितनी देर तक वहां रुके, इस बारे में पक्की जानकारी का अभी इंतजार है। मगर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का बयान बताता है कि चीनी फौजी उस जगह तक आ गए थे, जहां वे भारत को खासा नुकसान पहुंचा सकते थे। रावत ने कहा - 'अच्छी बात है कि उन्होंने वहां मौजूद महत्वपूर्ण नहर से छेड़छाड़ नहीं की।" साफ है कि चीनी सैनिक चमोली जिले में बाराहोटी के पास भारतीय इलाके में काफी अंदर तक आ गए थे। दुर्गम क्षेत्रों में फौजियों का कुछ दूर इधर या उधर भटकना इंसानी भूल हो सकती है, मगर इतना अंदर आना गलती से नहीं हो सकता। उत्तराखंड और चीन के बीच सीमा लगभग 350 किमी लंबी है। लेकिन यहां ऐसी गलती होने का इतिहास नहीं है। इसीलिए चीनी सैनिकों की ताजा घुसपैठ इरादतन लगती है।

इन दिनों चीन ने अपनी भारत विरोधी गतिविधियां तेज कर रखी हैं। संयुक्त राष्ट्र में पाक आतंकी जकीउर-रहमान लखवी को संरक्षण, एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध और कुछ दिन पहले पाक कब्जे वाले कश्मीर से लगी अपनी सीमा पर पाकिस्तानी और चीनी सैन्य बलों का साझा अभ्यास उसके इसी रुख का हिस्सा हैं। दरअसल, चीन की आक्रामकता का शिकार उसके कई दूसरे पड़ोसी देश भी बने हुए हैं। दक्षिण चीन सागर विवाद पर वियतनाम, फिलीपींस, ताईवान और जापान से उसके रिश्ते बिगड़ते चले गए हैं। हालांकि भारत सरकार ने अपने ढंग से चीनी कारगुजारियों का जवाब दिया है, मगर हाल तक वह तनाव ज्यादा बढ़ाने से बचती रही है। लेकिन धीरे-धीरे उसका सब्र जवाब दे रहा है। कुछ रोज पहले भारत में नियुक्त चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ" के तीन पत्रकारों की वीजा अवधि ना बढ़ाने का फैसला कर अपने सख्त रुख का परिचय दिया। इन पत्रकारों ने अपनी वीजा शर्तों का उल्लंघन किया था। अमूमन सरकारें मीडियाकर्मियों के ऐसे व्यवहार की अनदेखी कर देती हैं। लेकिन अब साफ है कि भारत चीन के प्रति कोई रियायत दिखाने को तैयार नहीं है। कुल संकेत भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ने का है। घुसपैठ की ताजा खबर के बाद इसमें और इजाफा होगा। इसके मद्देनजर भारत सरकार को अपनी सरहद की हिफाजत मजबूत करने व कूटनीतिक स्तर पर चीन को करारा जवाब देने की पुरजोर तैयारी करनी होगी। देश सरकार से चीन के प्रति सख्त रुख की अपेक्षा रखता है। सरकार को यह दोटूक पैगाम भेजना चाहिए कि चीन की गुस्ताखियां उसे महंगी पड़ेंगी।

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