रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से रूस में चीनी रक्षा मंत्री को खरी-खरी सुनाए जाने के बाद चीन की ओर से जैसी प्रतिक्रिया आई, उससे यही संकेत मिलता है कि वह अपने अड़ियल रवैये से बाज आने वाला नहीं है। एक ओर चीनी सेना लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति बदलने की कोशिश कर रही है और दूसरी ओर चीन सरकार यह डींग हांक रही है कि वह अपनी एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेगी। उसकी ऐसी हठधर्मिता के बाद भारत को यह सवाल उठाना चाहिए कि आखिर लद्दाख में उसकी जमीन कहां से आ गई? भारत को यह भी कहना चाहिए कि चीन तो तिब्बत पर अवैध तरीके से काबिज है और भारत की सीमा उससे मिलती ही नहीं। चीन जिन द्विपक्षीय समझौतों को महत्व देने को तैयार नहीं, उन्हें विश्व समुदाय के समक्ष लाकर उसकी चालबाजी का पर्दाफाश किया जाना चाहिए। चीन सरीखे कपटी देश के साथ सामान्य कूटनीतिक व्यवहार करने का कोई मतलब नहीं। एक ऐसे समय जब विश्व समुदाय चीन के विस्तारवादी रवैये से आजिज आ गया है और अमेरिका तिब्बत का सवाल उठा रहा है, तब फिर भारत के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह भी चीनी नेतृत्व को उसी की भाषा में जवाब दे।

यह सही समय है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह आवाज उठाए कि चीन तिब्बत खाली करे, क्योंकि उसने उस पर कब्जा करने के बाद वादा तो यह किया था कि वह इस क्षेत्र को स्वायत्तशासी बनाएगा। इसी के साथ चीन पर अक्साई चिन के साथ-साथ कश्मीर के उस हिस्से को भी छोड़ने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए, जो उसे पाकिस्तान ने दे दिया था। ये वे भूभाग हैं, जिन पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भारत का मजबूत दावा है। इन दावों के पक्ष में तमाम प्रमाण भी उपलब्ध हैं। इन हिस्सों पर चीन के फर्जी और मनगढ़ंत दावों की पोल खोली जानी चाहिए। चूंकि वह ऐसे ही फर्जी दावे दक्षिण चीन सागर को लेकर भी कर रहा है, इसलिए उसे बेनकाब करने में विश्व समुदाय का सहयोग लिया जाना चाहिए। उचित तो यह होगा कि भारत चीन के फर्जी दावों से तंग उसके सभी पड़ोसी देशों को नेतृत्व प्रदान करे। इसके अलावा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को हासिल करने की इच्छाशक्ति का प्रदर्शन भी करे। यह इस ढंग से होना चाहिए कि चीन को यह सीधा संकेत मिले कि पाकिस्तान के कब्जे वाले इस भारतीय भूभाग पर उसके द्वारा बनाया जा रहा आर्थिक गलियारा भारत को मंजूर नहीं। अहंकारी चीन के साथ कठोर कूटनीतिक व्यवहार इसलिए आवश्यक है, क्योंकि वह शांति और मित्रता की भाषा समझने को तैयार नहीं।

Posted By: Ravindra Soni

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