नासिक में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई को लेकर अनावश्यक बयान देने वालों को जो नसीहत दी, उसका असर अन्य दलों के नेताओं पर न भी पड़े, कम से कम भाजपा नेताओं पर तो अवश्य पड़ना चाहिए। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगोंं को 'बयान बहादुर करार देते हुए यह सही कहा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में हो, तब बड़बोलापन दिखाने से बाज आना चाहिए। हालांकि उनकी टिप्पण्ाी यह स्पष्ट नहीं करती कि वह किन लोगों की बयानबाजी को रेखांकित करना चाह रहे थे, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि चंद दिनों पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यह कहा था कि जैसे अनुच्छेद 370 को हटाया गया, वैसे ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जाना चाहिए। जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले की आधे से अधिक सुनवाई कर चुका हो, तब इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं।

नि:संदेह ऐसा नहीं है कि जो मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हो, उस पर कोई अपने विचार व्यक्त नहीं कर सकता, लेकिन संवेदनशील मामले में तो यह जरूरी हो जाता है कि प्रतिक्रिया संभलकर व्यक्त की जाए। यह बात नेताओं पर खास तौर से लागू होती है। मुश्किल यह है कि कई बयान बहादुर भाजपा में भी हैं और वे किसी न किसी मसले पर ऐसा कुछ बोलते ही रहते हैं, जिसका उल्लेख करके विरोधी दल पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हैं। अयोध्या मामले में भी भाजपा नेताओं के कुछ ऐसे बयान आए हैं, जिन्हें गैर-जरूरी ही कहा जाएगा।

हालांकि भाजपा नेतृत्व अपने बयान बहादुर नेताओं को समय-समय पर चेतावनी देने का काम करता रहा है, लेकिन बड़बोलापन दिखाने वाले रह-रहकर सामने आते ही रहते हैं। यह तब है, जब अतीत में कई बार भाजपा को अपने नेताओं के बड़बोलेपन से असहज होना पड़ा है। नेताओं का बड़बोलापन केवल संबंधित राजनीतिक दल को ही असहज नहीं करता, बल्कि भारतीय राजनीति की छवि को भी खराब करता है। बयान बहादुर नेता इससे अनभिज्ञ नहीं हो सकते कि सोशल मीडिया के इस दौर में उनके बेतुके बयान कई बार देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि वे मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाते हैं।

वैसे तो नेताओं के बड़बोलेपन का सिलसिला कायम रहने की एक वजह यह भी है कि मीडिया का एक हिस्सा उनके बेतुके बयानों की ताक में ही रहता है, लेकिन एक समस्या यह भी है कि कुछ नेता यह मान बैठे हैं कि अनाप-शनाप बयान देकर भी राजनीति चमकाई जा सकती है।