पाकिस्तान की हरकतों से यह साफ है कि उसे यह समझ नहीं आ रहा कि वह दुनिया को इसके लिए कैसे समझाए कि कश्मीर को लेकर उसकी ओर से जो कुछ कहा जा रहा है, वह सही है। वास्तव में इसी कारण वह छल-कपट के साथ झूठ का सहारा लेने में लगा हुआ है। चूंकि वह एक जिम्मेदार राष्ट्र की तरह व्यवहार करने से इनकार कर रहा है, इसलिए भारत को उससे निपटने के लिए कुछ नए तौर-तरीके अपनाने होंगे। कश्मीर पर हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मात खाने के बाद उसकी गैरजिम्मेदाराना हरकतें कुछ ज्यादा ही बढ़ती दिख रही हैं। उसने भारत को कुलभूषण जाधव से दोबारा संपर्क-संवाद करने की राजनयिक सुविधा देने से इनकार करके यही स्पष्ट किया कि उस पर नए सिरे से दबाव बनाने की जरूरत है। यह करीब-करीब तय है कि वह आसानी से सही रास्ते पर आने वाला नहीं है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कि कुलभूषण जाधव को राहत दिलाने और उन तक अपनी राजनयिक पहुंच स्थापित करने के लिए भारत की ओर से क्या कदम उठाए जाएंगे, लेकिन यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान झूठ पर जीने वाला एक असामान्य देश है। उसे न तो अपनी छवि की परवाह है और न ही प्रतिष्ठा की। इसीलिए वह एक ओर जहां कश्मीर को अशांत करने के लिए आतंकियों की घुसपैठ में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपनी जनता को उकसाने में भी लगा हुआ है। वह यह काम इसीलिए कर रहा है, ताकि अपने लोगों का ध्यान उन समस्याओं से हटा सके, जिनसे वह बुरी तरह त्रस्त है।

अब जब यह और अधिक स्पष्ट है कि सेना के वर्चस्व वाला पाकिस्तान कश्मीर के हालात बिगाड़ने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, तब भारत को उसे कठघरे में खड़ा करने, उसके झूठ को बेनकाब करने और उसे चेताने के अलावा भी कुछ करना होगा। यह कोई बेहतर स्थिति नहीं कि भारत पहले की तरह प्रतिक्रिया व्यक्त करता हुआ अथवा अपनी सीमाओं की चौकसी बढ़ाता हुआ दिखे। नि:संदेह मोदी सरकार ने एक झटके में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर और उसे नए सिरे से गठित करके पाकिस्तान के होश उड़ा दिए, लेकिन जब यह दिख रहा है कि वह सच को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं, तब फिर इसके अलावा और कोई उपाय नहीं कि उसके खिलाफ कुछ और कदम उठाए जाएं। ये कदम ऐसे होने चाहिए, जिससे उसे यह एहसास हो सके कि वह आतंक का सहारा लेकर भारत को तंग नहीं कर सकता। यह मान लेना सही नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त करके पाकिस्तान पर काबू पा लिया गया है।