कांग्रेस में बदलाव की मांग वाली वरिष्ठ नेताओं की चिट्ठी सार्वजनिक होने के बाद अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन कर यह संदेश देने की कोशिश अवश्य की है कि वह पार्टी के पूर्णकालिक अध्यक्ष का चयन करना चाह रही हैं, लेकिन अब भी लगता यही है कि वह राहुल गांधी को ही नए सिरे से पार्टी की कमान सौंपने की तैयारी कर रही हैं। इसका संकेत एक तो इससे मिलता है कि अध्यक्ष का चुनाव होने के पहले चिट्ठी लिखने वाले नेताओं और खासकर गुलाम नबी आजाद को महासचिव पद से हटा दिया गया और दूसरे, इससे भी कि पार्टी संगठन में राहुल गांधी के करीबी नेताओं को चुन-चुनकर प्राथमिकता दी गई।

नए बनाए गए महासचिवों में से ज्यादातर वे हैं, जो राहुल गांधी के समर्थक होने के साथ ही इस तरह की मांग करते रहे हैं कि उन्हें ही फिर से अध्यक्ष बनना चाहिए। राहुल गांधी को कोई पद न देने से भी यही प्रकट होता है कि उन्हें फिर अध्यक्ष बनाने का माहौल बनाया जा रहा है। राहुल गांधी के करीबी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाने से यह भी स्पष्ट है कि नए अध्यक्ष का चुनाव होने तक पार्टी में वही होगा, जो राहुल चाहेंगे। नए अध्यक्ष का चुनाव होने के पहले ही संगठन में व्यापक फेरबदल का इसके अलावा और कोई मतलब नहीं कि नवनियुक्त अध्यक्ष के पास अपने हिसाब से संगठन को खड़ा करने की सुविधा नहीं होगी। यह प्रियंका गांधी वाड्रा को पूरे उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाने से और अच्छे से स्पष्ट हो रहा है।

भले ही चिट्ठी लिखने वाले सभी नेताओं को किनारे न किया गया हो, लेकिन जिस तरह उनमें से ज्यादातर को तरजीह नहीं दी गई, उसका संदेश यही है कि इस तरह की चिट्ठी-पत्री स्वीकार्य नहीं। पता नहीं कांग्र्रेस को पूर्णकालिक अध्यक्ष कब मिलेगा, लेकिन इसमें दोराय नहीं कि तब तक कांग्रेस पर गांधी परिवार की पकड़ और मजबूत होने वाली है। यह सही है कि कांग्रेस का काम गांधी परिवार के बगैर नहीं चल सकता, लेकिन क्या इसका अर्थ यह होना चाहिए कि परिवार उस पर हावी होता जाए?

सोनिया गांधी अध्यक्ष पद छोड़ती हैं तो राहुल अध्यक्ष बन जाते हैं और वह प्रियंका वाड्रा को महासचिव बनाने के बाद यह कहते हुए अपने पद का परित्याग कर देते हैं कि अब परिवार के बाहर का कोई नेता पार्टी की कमान संभाले। इस राय का समर्थन प्रियंका भी करती हैं, लेकिन अबूझ कारणों से सोनिया अंतरिम अध्यक्ष बनना पसंद करती हैं। अब राहुल को फिर से अध्यक्ष बनाने की बिसात बिछा दी गई। आखिर यह सब करके पार्टी को संचालित किया जा रहा है या फिर परिवार को?

Posted By: Ravindra Soni

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