राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर लोकसभा में हुई तीखी बहस से यदि कुछ स्पष्ट हुआ तो यही कि कांग्रेस इस मसले को जितना ज्यादा खींचेगी, उतना ही अधिक असहज होगी। इस बहस के दौरान कांग्रेस किस तरह तर्कों से हीन थी, यह इससे साबित हुआ कि कांग्रेसी सांसदों ने सदन में कागजी जहाज उड़ाना बेहतर समझा। राफेल सौदे पर बहस के दौरान कांग्रेस को जिस तरह बोफोर्स तोप और अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद समेत नेशनल हेराल्ड मसले को लेकर ताने सुनने पड़े, उससे उसे यह समझ आ जाए तो बेहतर कि लड़ाकू विमानों के इस सौदे की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग का औचित्य तभी बन सकता है, जब ऐसे कोई सुबूत सामने लाए जा सकें, जिनके आधार पर गड़बड़ी को रेखांकित किया जा सके।

ऐसे सुबूत पेश करने के नाम पर कांग्रेस गोवा के एक मंत्री की एक अनाम शख्स के साथ बातचीत की ऑडियो क्लिप तो सामने लाई, लेकिन राहुल गांधी लोकसभा में उसे सुनाने की कोशिश में जिस तरह उसकी सत्यता प्रमाणित करने से पीछे हट गए, उससे तो जनता के मन में यही सवाल उठा कि कहीं यह फर्जी तो नहीं? ध्यान रहे कि गोवा के मंत्री ने तो इस ऑडियो क्लिप को फर्जी करार देते हुए उसकी जांच की मांग की ही, मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी साफ कर दिया कि उन्होंने कैबिनेट में कभी भी इस तरह की चर्चा नहीं की कि राफेल सौदे से संबंधित फाइलें उनके पास हैं। अब अच्छा यह होगा कि सरकार इस ऑडियो क्लिप की जांच कराने के लिए आगे बढ़े।

यह समझ में आता है कि सुप्रीम कोर्ट से राफेल सौदे को क्लीनचिट मिल जाने के बाद कांग्रेस के लिए इस मसले को छोड़ना मुश्किल हो रहा है, लेकिन सच यही है कि अब इस सौदे में घोटाला होने की रट लगाते रहने का कोई मतलब नहीं रह गया है। सच तो यह है कि राफेल सौदे पर सरकार को घेरने की कोशिश में खुद कांग्रेस अध्यक्ष घिरते चले जा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से राफेल लड़ाकू विमान खरीद की प्रक्रिया, विमानों की कीमत और ऑफसेट नीति पर सवाल उठाने का कोई मतलब इसलिए नही रह गया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं तीनों बिंदुओं पर अपना फैसला दिया है। कांग्रेस को यह भी देखना चाहिए कि आम जनता के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि आखिर संयुक्त संसदीय समिति सुप्रीम कोर्ट से बेहतर तरीके से राफेल सौदे की जांच-परख करने में कैसे सक्षम होगी? अतीत में इन समितियों ने किस तरह पक्षपाती आचरण और लीपापोती की है, वह किसी से छिपा नहीं।

राफेल सौदे को तूल देने के क्रम में कांग्रेसी नेता और खासकर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी सरकारी कंपनी एचएएल के हितों को लेकर कुछ ज्यादा ही चिंतित दिख रहे हैं, लेकिन क्या अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे की जांच यह नहीं बता रही है कि इस सौदे से इसी कंपनी को बाहर किया गया था? कांग्रेस अब भी राफेल सौदे को तूल देने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन अगर वह गढ़े गए तथ्यों के जरिए मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करेगी तो अपनी फजीहत का ही इंतजाम करेगी।

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