Bihar Election 1st Phase: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 71 सीटों पर बुधवार को मतदाताओं ने उत्साह का प्रदर्शन किया। लगभग 54.01 फीसद मतदान हुआ, जो 2015 के विधानसभा चुनाव के लगभग बराबर और 2010 के चुनाव की तुलना में करीब चार फीसद ज्यादा है। नक्सल प्रभावित बांका, गया, जमुई, कैमूर, लखीसराय और शेखपुरा में 55 फीसद से भी ज्यादा मतदान बता रहा है कि अपने सपनों की सरकार चुनने की सबमें बेताबी है। गांवों में सुबह से ही उत्साह दिख रहा था। कोरोना का खौफ कहीं नहीं दिखा। मतदान केंद्रों पर तैनात सुरक्षा बलों ने कोरोना नियमों का पालन कराने की पूरी कोशिश की। लोगों ने कोरोना से बचाव के पूरे इंतजाम किए, लेकिन उसका खौफ हावी नहीं होने दिए। हर बूथ पर थर्मल स्कैनिंग का पूरा इंतजाम था। एक आशा कार्यकर्ता थर्मल स्कैनिंग कर रहीं थी तो दूसरी वोटरों को ग्लव्स दे रही थी। वोटरों के कतारबद्ध होने के लिए सफेद गोले बनाए गए थे। नक्सली प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध थे।

35 सीटें थीं संवेदनशील

निर्वाचन आयोग ने पहले चरण में मगध और शाहाबाद इलाके की 71 सीटों में से 35 को संवेदनशील माना था। इनमें चार सीटें अति संवेदनशील थीं, जहां खतरे बड़े थे, मगर वोटिंग में आधी आबादी और युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा दिखी। पालीगंज विधानसभा क्षेत्र के उर्दू प्राथमिक विद्यालय, बेल्हौरी में जब भीड़ अधिक हुई तो बूथ पर तैनात केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों ने सैनिटाइजर देने का जिम्मा खुद संभाल लिया। इस क्षेत्र के पंचायत भवन, मंझौली के समीप जब वोटरों ने शारीरिक दूरी का ख्याल नहीं रखा तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें दो गज दूरी के नियम का पालन कराया, पर कुछ ही देर में सब कुछ पूर्ववत हो गया। कई जगहों पर कतार इतनी लंबी थी कि वोटर जमीन पर बैठ गए। वैसे बैठने में शारीरिक दूरी का ख्याल जरूर रखा।

कौन किसके आमने-सामने

इमामगंज में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के बीच भिड़ंत है। गया में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार एवं जहानाबाद में जदयू के कृष्णनंदन वर्मा कड़े मुकाबले में फंसे हैं। जमालपुर से शैलेश कुमार, लखीसराय से विजय सिन्हा, राजपुर से संतोष निराला, बांका से रामनारायण मंडल और चैनपुर से ब्रजकिशोर बिंद भी मैदान में हैं। दिनारा में लोजपा प्रत्याशी राजेंद्र सिंह और जदयू के जयकुमार सिंह के बीच दिलचस्प मुकाबला है। चिराग पासवान के दावे की सच्चाई भी इसी दौर में सामने आ चुकी है।

Posted By: Navodit Saktawat

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