नई दिल्ली। Delhi Assembly Election 2020: दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक दलों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है। ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी राजनीतिक दलों के लिए दिल्ली की एक विधानसभा सीट काफी अहम रहने वाली है। दरअसल राज्य की नई दिल्ली विधानसभा सीट का राजनीतिक पार्टियों के लिए खासा महत्व रहा है। यह सीट पिछले पांच चुनाव से सूबे को मुख्यमंत्री दे रही है। नई दिल्ली सीट से ही शीला दीक्षित 3 बार जीतकर मुख्यमंत्री बनी थीं, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी इसी सीट से लगातार दो बार जीतकर सीएम की कुर्सी पर काबिज हुए हैं। गौरतलब है कि पिछले 5 चुनावों से भाजपा को इस सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी है।

राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण सीट

नई दिल्ली विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टि से हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। विधानसभा के गठन के बाद से ही लुटियंस जोन का यह क्षेत्र काफी चर्चित भी रहा। साल 2008 में हुए परिसीमन के पूर्व इस सीट का नाम गोल मार्केट था। साल 1993 में इस सीट पर भाजपा ने क्रिकेटर से राजनेता बने कीर्ति आजाद को टिकट दिया था। आजाद ने सभी को चौंकाते हुए इस सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार ब्रजमोहन को हराया था। इसके बाद से ही भाजपा को इस सीट पर जीत नसीब नहीं हो सकी है।

1998 से लगातार तीन बार जीतीं शीला दीक्षित

इस सीट पर 1998 के बाद कांग्रेस की नेता शीला दीक्षित ने लगातार तीन जीत हासिल की। यहीं से जीतकर वह लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रहीं। 1998 में उन्होंने भाजपा के कीर्ति आजाद को ही करारी शिकस्त दी थी। परिसीमन के बाद इस सीट का नाम नई दिल्ली विधानसभा सीट रखा गया।

इस सीट पर सबसे दिलचस्प मुकाबला साल 2013 में हुआ था जब नई नवेली पार्टी के नए नवेले संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राजनीति की घिसी घिसाई नेता और तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को करारी शिकस्त दे डाली थी। इसके बाद साल 2015 में हुए चुनाव में भी केजरीवाल ने इसी सीट से बड़े अंतर से कांग्रेस के पूर्व मंत्री किरण वालिया को हराया था।

Posted By: Neeraj Vyas

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