रोहतक। हरियाणा में इस साल के आखिरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनने लगा है। जहां सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं ने मतदाताओं के बीच जाना शुरू कर दिया है, वहां कांग्रेस भी अपना पूरा दम लगाने की कवायद में जुटी है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा संकट है नेतृत्व अभाव का। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बागी तेवरों ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पढ़िए हरियाणा में कांग्रेस की स्थिति से जुड़ी यह रिपोर्ट -

- हरियाणा में कांग्रेस के लिए मुश्किल भरा वक्त तब शुरू हो गया था, जब लोकसभा चुनाव में उसे सभी 10 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था। वहीं, चौधरी बीरेंद्र सिंह और राव इंद्रजीत सिंह जैसे दिग्गज नेता कांग्रेस का

हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

- आज हरियाणा कांग्रेस में दो गुट बन गए हैं। पहला - पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का तो दूसरा - मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का।

- ऐसे हालात में हुड्डा की बगावत कांग्रेस को बहुत भारी पड़ सकती है। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के मुद्दे पर पार्टी का रुख कई प्रादेशिक नेताओं को हजन नहीं हुआ है। हालांकि सोनिया गांधी पूरी कोशिश कर

रही हैं और हुड्डा के साथ उनकी मुलाकात भी हुई है।

- हरियाणा में कांग्रेस के बड़े नेताओं के बारे में कहा जाता है कि हर कोई खुद को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहता है, लेकिन पार्टी के लिए कोई काम करने की इच्छा नहीं रखता है। कुल मिलाकर संगठन स्तर पर कांग्रेस बहुत कमजोर है।

- दूसरी ओर भाजपा पूरी तरह हावी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल प्रचार के लिए निकल चुके हैं। पिछली बार जाट बहुल सीटों पर पार्टी को जबरदस्त समर्थन मिला था। अब पार्टी की कोशिश गैर जाट वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की है। भाजपा ने प्रदेश की 90 में से 75 सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है।