Haryana Vidhan Sabha Chunav 2019:

नई दिल्ली। हरियाणा विधानसभा चुनाव का माहौल चरम पर है। हर पार्टी और हर नेता पूरा दम लगा रहे हैं। इस बीच, कांग्रेस ने यहां भी पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनावों की तर्ज पर दांव खेलने का फैसला किया है। इन राज्यों में किसानों और गरीबों की कर्ज माफी की घोषणा का वोटर्स पर बड़ा असर पड़ा था। हरियाणा में भी यही होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजी ने रविवार को यह जानकारी दी। हरियाणा में 19 अक्टूबर चुनावा प्रचार का आखिरी दिन है। इसके बाद 21 अक्टूबर को वोटिंग होगी और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के साथ ही 24 अक्टूबर को नतीजे आएंगे।

कुमारी सैलजा ने कहा किहरियाणा में भी कांग्रेस के सत्ता में आने पर गरीबों और किसानों के ऋण माफ किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से अधिकृत रूप में मुख्यमंत्री पद का कोई दावेदार घोषित नहीं किया जाएगा। पार्टी को बहुमत मिलता है तो चुनाव बाद नवनिर्वाचित विधायक ही अपना नेता चुनकर हाईकमान को बताएंगे।


बागियों की पहवाह नहीं, और मजबूत होगी कांग्रेस

बकौल सैलजा, हरियाणा के लिए कांग्रेस का चुनाव घोषणा-पत्र लगभग तैयार है। इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर और महाराष्ट्र के नेता संजय निरुपम के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अपने ही नेताओं की बगावत पहली बार नहीं है। कांग्रेस के सामने ऐसी अस्थायी चुनौतियां पहली भी आई हैं। खास बात यह है कि इसके बाद पार्टी और मजबूत होकर निकलती है।

सैलजा के अनुसार कि डॉ. अशोक तंवर पार्टी के स्टार प्रचारकों में एक थे, लेकिन पार्टी से इस्तीफा देना उनका व्यक्तिगत फैसला है। हमें एक बात याद रखनी चाहिए कि संगठन हमेशा व्यक्ति से बड़ा होता है। सैलजा ने विधानसभा चुनाव में दो मंत्रियों के टिकट काटे जाने को मनोहर सरकार की नाकामी बताया।