नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) से कांग्रेस के संभावित गठबंधन पर सोमवार को भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। उलटे, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दरबार में गठबंधन पर कांग्रेसियों में एक बार फिर रार ही देखने को मिली। पहले से दो-फाड़ पार्टी में गठबंधन के पक्ष में एक धड़े ने आवाज उठाई।

हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित और तीनों कार्यकारी अध्यक्षों सहित छह लोगों के विरोध के चलते राहुल कोई फैसला नहीं कर सके। राहुल गांधी ने सोमवार सुबह दस बजे इस मसले पर अपने आवास पर बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको, सह प्रभारी कुलजीत सिह नागरा, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित, तीनों कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव, राजेश लिलोठिया, पांच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा, अजय माकन, अरविन्दर सिह लवली, ताजदार बाबर, जेपी अग्रवाल व दिल्ली विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री शामिल हुए।

लगभग 40 मिनट तक चली इस बैठक में गठबंधन पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका। इसके बाद सभी नेताओं ने इस मामले में फैसला लेने की जिम्मेदारी राहुल गांधी पर छोड़ दी है।

गठबंधन के पक्ष में समर्थन बढ़ा

दिल्ली कांग्रेस में भी अब आप के साथ गठबंधन का समर्थन करने वालों का पलड़ा भारी हो गया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी के साथ बैठक में शामिल रहे 12 नेताओं में से छह लोग समर्थन में और छह विरोध में थे। सूत्रों के मुताबिक पीसी चाको, कुलजीत सिह नागरा, अजय माकन, सुभाष चोपड़ा, अरविन्दर सिह लवली, ताजदार बाबर ने गठबंधन का समर्थन किया। जबकि, शीला दीक्षित, हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव, राजेश लिलोठिया, जेपी अग्रवाल और योगानंद शास्त्री ने गठबंधन का विरोध किया। हालांकि, अब गठबंधन का पक्ष कुछ भारी नजर आ रहा है।

इसकी वजह यह है कि अब तक विरोध में खड़े सुभाष चोपड़ा और अरविन्दर सिह लवली गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली के 14 जिला अध्यक्षों और दिल्ली के तीनों नगर निगमों में पार्टी के पार्षदों का नेतृत्व करने वाले नेताओं ने भी गठबंधन के समर्थन में पत्र दिया है। सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा संचालित शक्ति एप पर गठबंधन को लेकर की गई रायशुमारी में भी 50 फीसद से अधिक कार्यकर्ताओं ने गठबंधन के पक्ष में अपनी राय दी है।

बैठक के दौरान हुई नोकझोंक

सबसे पहले जेपी अग्रवाल ने इस पर बात शुरू की और गठबंधन नहीं होने का अपना तर्क दिया। उसके बाद अजय माकन, अरविन्दर सिह लवली ने कहा कि राष्ट्रहित में गठबंधन होना चाहिए। इसमें पार्टी की भी भलाई है। एक के बाद एक सभी ने अपनी बातें रखीं और आखिर में शीला दीक्षित ने कहा कि मैं अपने पुराने स्टैंड पर कायम हूं।

सूत्रों का कहना है कि शीला मीडिया में दिए गए चाको के बयान से नाराज भी दिखीं। इस बीच दोनों धड़ों में नोकझोंक होने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, गठबंधन नहीं हो, इस पर कोई भी नेता अपना सही तर्क नहीं रख सका। वहीं पक्ष में तर्क दे रहे नेता ने कहा कि कहा कि हम भाजपा को थाली में परोस कर सातों सीट नहीं दे सकते, हमें हर हाल में उन्हें रोकना है।

एक-दो दिन में हो सकता है फैसला

पार्टी सूत्रों की मानें तो आप के साथ गठबंधन पर एक-दो दिन में फैसला लिया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि गठबंधन होने या न होने की घोषणा खुद दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित और दिल्ली प्रभारी पीसी चाको करें। शीला को चुनाव से ऐन पहले प्रदेश की कमान थमाई गई है, ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि उन्हें नजरअंदाज कर राहुल कोई भी फैसला लेना नहीं चाहेंगे।