मल्टीमीडिया डेस्क। गजेंद्रसिंह शेखावत ने जोधपुर सीट से जीत दर्ज की है, लेकिल यह सीट उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही चर्चा में आ गई, क्योंकि उनके मुकाबले में कांग्रेस ने सूबे के सीएम अशोक गेहलोत के बेटे वैभव गेहलोत को खड़ा किया था, लेकिन गजेंद्र सिंह के राजनीतिक अनुभव के आगे वैभव गेहलोत का सियासी रसूख चल नहीं पाया और गजेंद्र सिंह शेखावत वैभव गेहलोत को मात देकर दिल्ली के सफर पर निकल पड़े।

आरएसएस समर्थक और भाजपा के शीर्ष नेतृत्‍व के बेहद नजदीक माने जाते हैं गजेंद्र सिंह शेखावत। शेखावत को सितंबर 2017 में कृषि राज्‍य मंत्री बनाया गया था। शेखावत ने 1992 में जय नारायण व्‍यास यूनिवर्सिटी जोधपुर में छात्र राजनीति के जरिये छात्र संगठन का अध्‍यक्ष बनकर अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। भारतीय जनता पार्टी के गजेंद्र सिंह शेखावत ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। शेखावत ने चुनाव में 2,74,440 वोट से वैभव गेहलोत को हराया है। 1980 से लेकर 1999 तक पांच बार अशोक गहलोत ने जोधपुर से लोकसभा चुनाव जीता था यानी गेहलोत को उनके गढ़ में शेखावत ने मात दी है।

गजेंद्र सिंह शेखावत का जन्म 3 अक्टूबर 1967 को जैसलमेर में हुआ। इससे पहले शेखावत कैबिनेट में कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। राजपूत परिवार में जन्में गजेंद्र सिंह सीकर जिले के महरौली गांव से संबंध रखते हैं। उन्होंने जोधपुर में जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी से अपनी पढाई पूरी की। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की, 1992 में वे जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट बने थे। गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा चुनाव में जोधपुर से जीत दर्ज कर संसद में जगह बनाई, शेखावत भाजपा विंग के राष्ट्रीय किसान मोर्चा के महासचिव भी हैं।

2014 के चुनाव में गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर के भूतपूर्व नरेश गजसिंह की बहन चंद्रेश कुमारी को में 4,10,051 से हराया था।

स्वदेशी जागरण मंच के सह-संस्थापक रहे हैं। राजस्थान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों में काफी दौरा करते हैं। ‘सीमा जन कल्याण समिति’ नाम का एक संगठन के संस्थापक सदस्य रहे हैं। यह संघ का ही एक अनुषांगिक संगठन है। इस संगठन का लक्ष्य देश की सीमा पर नागरिकों की सहायता से दूसरी लाइन का सुरक्षा तन्त्र स्थापित करना और घुसपैठ और जासूसी की खबर सुरक्षा बालों तक पहुंचाना है।

Posted By: Yogendra Sharma