गुरदासपुर। लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण का चुनाव 19 मई रविवार को शुरू हो चुका है। इस दिन 59 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें पंजाब की सभी 13 सीटें भी शामिल हैं। यहां की गुरदासपुर सीट चर्चा का विषय रही है। गुरदासपुर सीट में कुल 15.95 लाख मतदाता 19 मई को लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में मतदान करेंगे। इस सीट से भाजपा ने अभिनेता सनी देओल को मैदान में उतारा है। उनके सामने कांग्रेस के मौजूदा सांसद सुनील जाखड़ है। गुरदासपुर सीट पर जाखड़ और देओल के अलावा आम आदमी पार्टी के पीटर मसीह और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के लाल चंद भी मैदान में हैं।

गुरदासपुर सीट में इससे पहले भी भाजपा ने 'सेलेब्रिटी कार्ड' खेला था। साल 1998 में भाजपा ने इस सीट से विनोद खन्ना को उतारा था और उन्होंने कांग्रेस की नेता एवं पांच बार की सांसद सुखबंस कौर भिंडर को हराया था। इस लोकसभा सीट पर दो दशकों तक भाजपा का कब्जा रहा है। विनोद खन्ना ने 1998, 1999, 2004 और 2014 में इस सीट पर जीत हासिल की थी।

27 अप्रैल, 2017 को विनोद खन्ना के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए थे, जिसमें कांग्रेस के प्रत्याशी सुनील जाखड़ को यहां रिकॉर्ड मतों से जीत मिली थी। इस बार भाजपा के टिकट के दावेदारों में सलारिया, विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना भी दावेदार थीं, लेकिन पार्टी ने फिर स्टारडम पर भरोसा किया और अभिनेता सनी देओल को मैदान में उतारा। हालांकि, विनोद खन्ना की पत्नी कविता इस बात से काफी निराश थी कि उनकी बजाए सनी देओल को मौका दिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वह ठगा हुआ महसूस कर रही हैं।

राजनीति के मैदान में पहली बार उतरे अभिनेता सनी देओल ज्यादा कुछ बोलने के बजाय केवल इतना ही कहते हैं कि वे यहां बहस करने या भाषण देने के लिए नहीं आए हैं, वे तो देश तथा लोगों की सेवा के लिए आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे विनोद खन्ना के शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स को पूरा करेंगे। उन्हें लोगों से मिल रहे प्यार पर भरोसा है। उनके मुताबिक जनता ने जो मुझ पर भरोसा जताया है, वही मेरी जीत का कारण बनेगा।

गौरतलब है कि सनी के प्रचार के लिए उनके पिता धर्मेन्द्र तथा भाई बाबी देओल जुटे हुए थे। हालांकि, धर्मेंद्र के मुताबिक यदि उन्हें पहले पता होता कि इस सीट से कांग्रेस ने सनी के खिलाफ बलराम जाखड़ के बेटे सुनील जाखड़ को टिकट दिया है, तो वे सनी को चुनाव लड़ने नहीं देते।

मालूम हो, दिग्‍गज कांग्रेस नेता बलराम जाखड़ और धर्मेंद्र पक्के दोस्त थे। वे एक-दूसरे को भाई मानते थे। साल 1991 में बलराम जाखड़ ने राजस्थान की सीकर सीट से चुनाव लड़ा था, तो धर्मेंद्र प्रचार के लिए पहुंचे थे। फरवरी 2016 में बलराम जाखड़ का निधन हो चुका है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, पीयूष गोयल, वीके सिंह, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल सहित भाजपा-अकाली गठबंधन के वरिष्ठ नेता तक सनी के प्रचार में कसर नहीं छोड़ रहे।

Posted By: Arvind Dubey