मल्टीमीडिया डेस्क। वे कहते थे, आएगा तो मोदी ही... इसे कहते हैं विश्वास... इस विश्वास को पीएम मोदी ने बखूबी पहचाना। खुद दूसरी बार पीएम बने, साथ ही अपने सहित 303 एमपी भी बनाए। जनता के विश्वास को जनादेश में तब्दील कर वो दिल्ली दरबार के तख्त पर काबिज हुए यह बात सही साबित हुई कि मोदी है तो मुमकिन है। नरेंद्र दामोदरदास मोदी, कुशल प्रशासक, प्रखर वक्ता और समय की नब्ज पकड़कर चलने वाले एक ऐसे राजनेता जिन्होंने हिंदुस्तान की सियासत में अकेले दम पर सत्ता में वापसी की। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को हथियार बनाया और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जंग को जीत लिया।

नरेंद्र मोदी को जब भाजपा का सेनापति बनाया गया तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि हम आपके भरोसे पर खरा उतरेंगे। नरेंद्र मोदी ने सुनियोजित नीतियां बनाई और इस तरह से 2014 के चुनाव में फतह हासिल कर ली। उसके बाद अब लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती थी। इसलिए ऐसी नीतियां बनाई गई, जिनका जनता से सीधा वास्ता था।

जनहित में बनाई योजनाएं और जनता को पहुंचाया फायदा

यह भी पढें: Rare Photos of PM Modi: PM मोदी की दुर्लभ तस्‍वीरें जो आप बार-बार देखना चाहेंगे

देशभर में स्वच्छता मिशन का आगाज किया गया। इस योजना का सबसे अहम हिस्सा कम लागत में घरों में शौचालयों का निर्माण करना था। मोदी सरकार की इस योजना को खासकर महिलाओं ने काफी पसंद किया। इसके साथ हर गांव, कस्बे और शहर को स्वच्छ करने की योजना भी बनाई गई। महिलाओं को धुएं वाले चूल्हे से मुक्ति दिलाने के लिए उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन प्रदान किए गए। जिससे महिलाओं की जिंदगी काफी आसान हो गई।

हर घर को रोशन करने के लिए सस्ते एलईडी बल्ब की योजना लाई गई। जिससे ऊर्जा की काफी बचत हुई जिसका फायदा सरकार और उपभोक्ता दोनों का हुआ। हर भारतीय के सिर पर छत के लिए नई आवाास योजना से कई लोगों के घर का सपना साकार हुआ। नोटबंदी का पासा फेंककर भ्रष्टाचार और इसके साथ आतंकवाद पर भी कड़ा प्रहार किया गया। किसानों के लिए एकमुश्त राशि की व्यवस्था की गई ताकी उनका गुजर- बसर आराम से चलता रहे।

कमजोर विपक्ष का उठाया फायदा और दिया करारा जवाब

पीएम मोदी को मिले प्रचंड बहुमत में कमजोर और बिखरे हुए विपक्ष का भी अहम रोल रहा। विपक्ष के ज्यादातर कद्दावर नेता पीएम बनने का ख्वाब देख रहे थे। मोदी के विरोध में खड़े इन नेताओं ने कई बार अपनी ख्वाहिश का इजहार खुले तौर पर किया। पीएम पद की अस्पष्ट और हर तरफ आ रही दावेदारी का भी जनता में गलत संदेश गया। देश के प्रमुख विपक्षी दल ने राफेल मामले को जोर-शोर से उछाला और 'चौकीदार चोर है का नारा दिया' जनता को कांग्रेस का यह अंदाज पसंद नहीं आया और अवाम ने सियासी दलों की आवाज को कोई तवज्जो नहीं देने का मन बना लिया।

अब उम्मीदों पर खरा उतरने की बारी

अब शपथ लेने के साथ ही भविष्य की योजनाओं पर अमल करने की बारी है। क्योंकि जनता ने उम्मीदों का जनादेश पीएम मोदी को दिया है। रोजगार, कारोबार और ऐसे तमाम मुद्दों को पूरा करने के लिए पीएम मोदी के पास लंबा वक्त भी है और साथ ही जनता-जनार्दन के सपनों को पूरा करने के लिए बेरोक-टोक और बेखौफ काम करने के लिए प्रचंड बहुमत भी है।

Posted By: Yogendra Sharma