रायपुर। छत्तीसगढ़ के सियासी समर में रामधुन और रामायण की चौपाई ने भी वोटरों की मनोदशा को प्रभावित करने का भरपूर काम किया है। प्रदेश में तीन सांसदों ने न सिर्फ चुनाव प्रचार के दौरान रामधुन और रामायाण की चौपाई गाकर प्रचार किया, बल्कि जोरदार तरीके से जीत भी दर्ज की।

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा वोट से जीतने वाले दुर्ग सांसद विजय बघेल अपनी चुनावी सभा में रामायण की चौपाई गाते नजर आए। विजय बघेल बताते हैं कि रामायण की चौपाई से वोटर सीधे जुड़ते हैं। वहीं, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय अपनी हर चुनावी सभा में दो से तीन चौपाई गाते थे। यही नहीं, संतोष ने संघ गीत भी जमकर गाए। युवा वोटरों को अपने पाले में करने के लिए देशभक्ति संघ गीत को उन्होंने बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

संतोष बताते हैं कि वे बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते थे। इस दौरान सभा-सम्मेलनों में संघ गीत गाने का जिम्मा उनके पास ही रहता था। छत्तीसगढ़ का विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव, बड़े नेताओं के मंच पर पहुंचने से पहले संतोष अपने देशप्रेम वाले गीतों से भीड़ को बांधने का काम करते नजर आते थे। विधानसभा चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की राजधानी में सभा के दौरान उन्होंने करीब 20 मिनट तक संघ गीत गाया।

ऐसा माहौल बनाया कि मौजूद लोग भी गीत गाने लगे। दरअसल, अमित शाह भी अपनी सभी सभाओं में सबसे पहले वंदेमातरम गीत का गायन कराते हैं। खास बात यह है कि शाह खुद भी पूरा वंदेमातरम गाते हैं। इससे प्रेरित होकर भाजपा नेताओं ने संघ गीत से लेकर रामधुन और रामायण की चौपाई गाना शुरू किया है।

कांकेर से सांसद चुने गए मोहन मंडावी ने बताया कि वे पिछले 20 साल से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रामधुन सुनाते रहे हैं। कांकेर और आसपास के इलाके में उनकी रामधुन के नाम पर ही पहचान भी है। अब संसद पहुंचने पर मंडावी कहते हैं कि क्षेत्र की जनता ने जिस उम्मीद से चुनकर भेजा है, उसे पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती है। पांच साल अब रामधुन गाना और जनता की आवाज सुनना, यही उनकी प्राथमिकता रहेगी।

Posted By: Hemant Upadhyay

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