धीरज गोमे, उज्जैन। मध्यप्रदेश की उज्जैन-आलोट संसदीय सीट भाजपा का मजबूत 'किला' मानी जाती है। हालांकि बीते साल विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्र की आठ सीटों में से पांच पर कांग्रेस ने जीत हासिल कर भाजपा की नींद उड़ा दी है। अब भाजपा के सामने अपना किला बचाने की चुनौती है। दूसरी ओर कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित है।

भाजपा ने वर्तमान सांसद चिंतामणि मालवीय का टिकट काटकर विधानसभा चुनाव में तराना से हारे प्रत्याशी अनिल फिरोजिया को मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस ने यहां से बाबूलाल मालवीय को उतारा है। इस बीच सूबे के राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इस बार सीट पर मुकाबला रोचक है।

उज्जैन लोकसभा सीट पर 1989 से लेकर 2004 तक भाजपा लगातार जीत हासिल करती रही। 2004 में कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू ने सात बार के सांसद रहे सत्यनारायण जटिया को हराया था। मगर 2014 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा यहां तीन लाख से अधिक वोटों से जीत गई।

संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से कुछ पर जातीय समीकरण भी हावी हैं। इसलिए दोनों प्रमुख दल हर तरह राजनीतिक दांव खेल रही है। यहां की 63.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 36.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। 26 फीसदी आबादी यहां की अनुसूचित जाति के लोगों की है और 2.3 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है।

संसदीय क्षेत्र में यह विधानसभा क्षेत्र में शामिल

घटि्टया, बड़नगर, महिदपुर, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, तराना, नागदा-खाचरौद, आलोट।

1967 में एससी के लिए आरक्षित हुई

वर्ष 1967 में उज्जैन-आलोट की सीट अनुसूचित जाति वर्ग लिए आरक्षित हो गई थी। परिसीमन के बाद यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। इसके बाद अगले तीन चुनाव में भी कांग्रेस को लगातार हार मिली। 1984 में कांग्रेस के सत्यनारायण पंवार ने चुनाव जीता। मगर अपनी जीत को वे अगले 1989 के चुनाव में दोहरा नहीं सके। भाजपा के सत्यनारायण जटिया यहां से जीते और फिर अगले छह चुनाव जीतते चले गए। 2009 के चुनाव में प्रेमचंद गुड्डू ने उन्हें मात देकर इतिहास रचा। इसके बाद साल 2014 के चुनाव में भाजपा ने अपना बदला ले लिया। भाजपा के प्रो. चिंतामणि मालवीय ने प्रेमचंद गुड्डू को करारी शिकस्त दी। भाजपा अब तक के इतिहास में 8 और कांग्रेस 4 बार चुनाव जीत चुकी है।

ये वादे रहे अधूरे

  • बड़े उद्योग स्थापित नहीं हो पाए। विक्रम उद्योगपुरी और बांदका स्टील प्लांट धरातल पर नहीं उतरा।
  • बेरोजगारी मिटाने के वादे अधूरे रहे। जिले में 60 हजार से अधिक पंजीकृत बेरोजगार हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या।
  • 100 स्मार्ट गांव बनाने थे, एक भी स्मार्ट विलेज की अवधारणा पूरी नहीं हुई।

कौन-कब रहा सांसद

वर्ष सांसद दल

1957 व 62 राधेलाल व्यास कांग्रेस

1967 हुकुमचंद कछवाय जनसंघ

1971 फूलचंद वर्मा जनसंघ

1977 हुकुमचंद कछवाय बीएलडी

1980 डॉ. सत्यनारायण जटिया भाजपा

1984 सत्यनारायण पंवार कांग्रेस

1989 से डॉ. सत्यनारायण जटिया भाजपा

2004 तक

2009 प्रेमचंद गुड्डू कांग्रेस

2014 डॉ. चिंतामणी मालवीय भाजपा

संसदीय क्षेत्र में कहां कितने मतदाता

उज्जैन उत्तर - 222235

उज्जैन दक्षिण - 246265

घटि्टया - 206714

तराना - 176162

महिदपुर - 195464

नागदा-खाचरौद - 207650

बड़नगर - 191386

आलोट - 201480

Posted By: Hemant Upadhyay