वायनाड (केरल)। लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत बुरा रहा। खुद राहुल गांधी अपनी परंपरागत सीट अमेठी से हार गए। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष ने केरल की वायनाड सीट से 4.31 लाख वोट से जीत दर्ज की। शुरू में लग रहा था कि राहुल वायनाड में लोकसभा चुनाव इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर सकते हैं, क्योंकि कुल 10,92,197 मतदाताओं वाली इस सीट पर एक वक्त राहुल करीब 8 लाख वोट से आगे चल रहे थे। चुनाव आयोग की वेबसाइट के इस आंकड़े के हवाले से कहा गया था कि यदि राहुल इसी आंकड़े पर जीत दर्ज कर लेते हैं तो यह देश में लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत होगी। अब तक यह रिकॉर्ड भाजपा की प्रीतम मुंडे के नाम है, जिन्होंने 2014 के उपचुनाव में कांग्रेस के अशोक पाटिल को 6,96,321 वोट से हराया था। हालांकि ऐसा हो सका, क्योंकि आगे के चरणों में राहुल गांधी ने अपनी बढ़त गंवा दी।

राहुल को वायनाड से कुल 7,06,367 वोट मिले, जबकि उनके विपक्षी सीपीआई के पीपी सुनील को 2,74,597 वोट हासिल हुए।

वहीं देश में मतों के अंतर से लोकसभा की सबसे बड़ी जीत की बात करें तो अभी दूसरे नंबर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनिल बसु हैं, जिन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की आरामबाग सीट से 5,92,502 वोटों से हराया था। तीसरे नंबर पर पीवी नरसिम्हा राव हैं, जिन्होंने 1991 में बंगारू लक्ष्मण को 5.80 लाख वोट से हराया था। 2014 के चुनाव में मोदी ने वडोदरा सीट से 5.70 लाख वोट से जीत दर्ज की थी।

कांग्रेस का गढ़ है वायनाड

इस बार वायनाड में राहुल गांधी का मुकाबला सीपीआई के पीपी सुनील से था। खबर लिखे जाने तक राहुल 8,32,442 वोट से आगे चल रहे हैं। वायनाड को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में भी इस सीट पर कांग्रेस ने ही कब्जा किया था। तुषार वेल्लापल्ली ने अपनी इस पार्टी की शुरुआत साल 2016 में की थी, उन्होंने विधानसभा चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल पाई थी।

तुषार वेल्लापल्ली की BDJS केरल के मशहूर धार्मिक संगठन श्रीनारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) का ही एक राजनीतिक संगठन है। इस समूह के अतंर्गत इझावा समुदाय का प्रतिनिधित्व होता है जिसकी केरल में 20 फीसदी आबादी है। बता दें कि तुषार वेल्लापल्ली के पिता वेल्लापल्ली नेदाशन SNDP के जनरल सेक्रेटरी हैं।

Posted By: Arvind Dubey