मुंबई। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर स्थितियां अब भी स्पष्ट नहीं हैं। कांग्रेस-राकांपा-शिवसेना को मिलाकर बनी 'महाशिवआघाड़ी' अपनी सरकार बनाने का दावा कर रहे है। वहीं, भाजपा नेताओं का दावा है कि भाजपा के सिवाय और किसी की सरकार नहीं बन सकती है। 'महाशिवआघाड़ी' के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले राकांपा प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को नागपुर प्रेस क्लब में कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। पवार के मुताबिक, कांग्रेस-राकांपा-शिवसेना की यह सरकार न सिर्फ बनेगी, बल्कि अपना कार्यकाल भी पूरा करेगी। पवार ने राज्य में मध्यावधि चुनाव की संभावना से साफ इन्कार करते हुए कहा कि हम सब राज्य में स्थिर सरकार बनाना चाहते हैं।

उससे पहले तीनों दलों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम और अन्य मसलों पर चर्चा जारी है। मुख्यमंत्री किसका होगा, इस सवाल का जवाब देते हुए पवार ने शिवसेना का नाम लिए बिना कहा कि जिसकी मुख्यमंत्री पद की मांग होगी, उस पर विचार किया जाएगा। लेकिन पवार की ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक स्पष्ट कर चुके हैं कि 'महाशिवआघाड़ी' की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद शिवसेना को दिया जाएगा। मलिक ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद की वजह से ही शिवसेना राजग गठबंधन से अलग हुई है। वहां शिवसेना का अपमान हुआ है। इसलिए नए बने गठबंधन में मुख्यमंत्री पद उसे ही मिलेगा।

इससे पहले कांग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे भी मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिए जाने की बात कह चुके हैं। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भी शुक्रवार को फिर मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनने की बात न सिर्फ दोहराई, बल्कि अगले 25 साल तक शिवसेना का ही मुख्यमंत्री बने रहने का भी दावा किया।

दूसरी ओर, कांग्रेस-राकांपा के साथ-साथ शिवसेना की भी प्रतिद्वंद्वी बन चुकी भाजपा अब भी अपना मुख्यमंत्री बनाने के दावे पर अडिग दिख रही है। मुंबई में चल रही भाजपा की तीन दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन उसके प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि राज्य में जिसके पास 119 विधायक हैं, उसे साथ लिए बिना किसी की सरकार बन ही नहीं सकती। इसलिए सरकार तो भाजपा के ही नेतृत्व में बनेगी।

गौरतलब है कि भाजपा को विधानसभा चुनाव में 105 सीटें मिली हैं और उसको 14 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा सरकार बनाने की कोशिशों पर तो चर्चा कर ही रही है, भविष्य में मध्यावधि चुनाव होने की स्थिति के लिए आगे की रणनीति भी बना रही है। बैठक में भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य भाजपा एक करोड़ 42 लाख मतों के साथ प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। वह 164 सीटों पर लड़कर 105 सीटों पर जीती है। हारी हुई 59 सीटों में से 55 पर वह नंबर दो पर है। अन्य दलों से भाजपा में आए 26 उम्मीदवारों में से 16 जीते है। दरअसल, भाजपा ये आंकड़े अपने कार्यकर्ताओं को बताकर भविष्य के लिए उनका मनोबल ऊंचा रखना चाहती है।

Posted By: Yogendra Sharma