Maharashtra Govt Formation: महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासत का टी-20 जारी है। रोज नए उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं। हर घंटे एक नया संस्पेंस सामने आ रहा है। इस बीच, राजनेताओं की बयानबाजी में भी क्रिकेट कमेंट्री की झलक देखने को मिल रही है। जब शिवसेना (Shivsena), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस (Congress) मिलकर प्रदेश में सरकार बनाने की कवायद में जुटे हैं, तब गडकरी ने गूगली फेंकी। इसे जवाब महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने दिया। नीचे पढ़िए रोचक कमेंट्स। बता दें, महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी और 24 को नतीजे घोषित हुए थे, लेकिन अब तक सरकार नहीं बन पाई है।

जो मैच हारते दिखता है, वह जीत भी जाता है : गडकरी

महाराष्ट्र में चल रहे नए सियासी खेल पर केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने एक 'गूगली' फेंकी है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री गडकरी ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा- 'क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी हो सकता है। कभी ऐसा लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन परिणाम ठीक उलटा होता है।' हालांकि उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति पर ज्यादा बातें करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह ज्यादातर समय दिल्ली में रहते हैं और वह अपने गृह राज्य की राजनीति के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं।

क्रिकेट में बॉल दिखता है, सियासत में नहीं : थोरात

वहीं, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने कहा कि 'क्रिकेट में आप बॉल को देख सकते हैं, लेकिन राजनीति में आप यह नहीं देख सकते।' मालूम हो कि विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद दोनों दलों में मुख्यमंत्री पद को लेकर तकरार के कारण नई सरकार नहीं बन पाई। इसके बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने यह कहते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी कि मौजूदा हालात में स्थिर सरकार का गठन संभव नहीं है। केंद्र ने राज्यपाल की सिफारिश पर मुहर लगाते हुए राष्ट्रपति शासन लगा दियाहै।

शिवसेना की भावना का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी : मलिक

राकांपा के प्रमुख प्रवक्ता नवाब मलिक ने भी मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना के दावे की पुष्टि करते हुए कहा- 'मुख्यमंत्री शिवसेना से होगा। शिवसेना मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही महायुति (भाजपा-शिवसेना गठबंधन) से बाहर निकली है। हमारी जिम्मेदारी है कि उसकी भावना का सम्मान करें।'

Posted By: Arvind Dubey