मुंबई। महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर अब भी शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस के बीच मंथन का दौर जारी है। इस बीच भाजपा भी समीकरणों को अपने पक्ष में करने में जुटी है। इस बीच शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस के नेता आज शाम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करने जाने वाले हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस दौरान वह सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे लेकर तीनों ही दलों में से किसी की भी तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। लेकिन तीनों ही दलों के बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। अब तीनों दलों के आला कमान का इस पर मंथन जारी है। खासकर कांग्रेस की सहमति का शिवसेना और एनसीपी को बेसब्री से इंतजार है। इस बीच भाजपा भी इस सियासी घमासान में सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है। सरकार बनाने की इस कवायद की जानें हर ताजा अपडेट्स

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की राज्यपाल से मुलाकात स्थगित

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से आज शाम होने वाली मुलाकात स्थगित हो गई है। तीनों दलों ने आखिर राज्यपाल से मुलाकात क्यों स्थगित कर दी है। फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

शिवसेना ने लगाया हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना खुलकर आमने सामने आ चुकी हैं। इस बीच शनिवार को भी शिवसेना की ओर से भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया गया। मुखपत्र सामना में कहा गया कि भाजपा जिस तरह से राज्य में सरकार बनाने का विश्वास दिखा रही है उससे हॉर्स ट्रेडिंग के संकेत मिल रहे हैं।

संजय राउत ने किया यह ट्वीट

शिवसेना और भाजपा का 30 साल पुराना गठबंधन टूट चुका है। शिवसेना और भाजपा के बीच अब जुबानी तीर चल रहे हैं। इस बीच शिवसेना भाजपा पर लगातार हमलावर रही है। शनिवार को संजय राउत ने बशीर बद्र का एक शेर ट्वीट किया है ' यारों नये मौसम ने ये एहसान किया है। याद मुझे दर्द पुराने नहीं आते।' माना जा रहा है कि राउत ने यह ट्वीट भाजपा को निशाने पर लेकर किया है।

सरकार बनाने का जादुईं आंकड़ा छूने की हो रही कोशिश

सूबे में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है। बता दें कि विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को आ गए थे लेकिन कोई भी दल बहुमत के 145 के जादुईं आंकड़े को नहीं छू सका था। हालांकि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को जनता ने पूर्ण बहुमत दिया था, लेकिन दोनों दलों के बीच सीएम कुर्सी की लड़ाई इस कदर छिड़ी की राज्य में राष्ट्रपति शासन की नौबत आ गई।

अब शिवसेना 30 साल पुराने अपने परंपरागत साथी को छोड़कर कांग्रेस जैसी धुरविरोधी पार्टी को साथ लेकर सरकार बनाने की माथा पच्ची में जुटी हुई है।

Posted By: Neeraj Vyas