नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी घटनाक्रमों पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने सोमवार को संसद के दोनों में भारी हंगामा किया। इससे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करना पड़ी। लोकसभा में हंगामे के बीच ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुबह 11 बजे प्रश्नकाल के दौरान यह कहते सवाल पूछने से इनकार कर दिया कि 'सवाल पूछने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है।"

कांग्रेसी सदस्य वेल आकर तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी कर रहे थे। दो सांसद वेल में एक बड़ा बैनर लेकर खड़े थे। काले रंग के उस बैनर पर 'सेव मर्डर ऑफ डेमोक्रेसी" (लोकतंत्र की हत्या बंद करो) तथा 'सेव कांस्टीट्यूशन" व 'सेव डेमोक्रेसी" (संविधान बचाओ व लोकतंत्र बचाओ) लिखा था। स्पीकर ने सदस्यों के बड़े बैनर को लेकर वेल में आने पर नाराजगी जताई। लेकिन सदस्यों पर उसका कोई असर नहीं होता देख उन्होंने मार्शलों को बैनर पकड़े दो कांग्रेसी सदस्यों- हिबी ईडेन तथा टीएन प्रथपन को बाहर निकालने का आदेश दिया। उन्हें बाहर निकाले जाने का विरोध करते हुए अन्य कांग्रेसी सदस्य भी मार्शलों के साथ झूमाझटकी करने लगे। इस पर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। हंगामा जारी रहने के पर सदन की कार्यवाही फिर 2 बजे तक स्थगित की गई।

दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के समय स्थिति सामान्य देख आसन ने केंद्रीय मंत्रियों को अपने प्रस्ताव पेश करने को कहा। लेकिन जैसे ही मंत्री संतोष गंगवार ने भवन एवं निर्माण मजदूरों से संबंधित सलाहकार समिति में लोकसभा के दो सदस्यों को चुनने का प्रस्ताव पेश किया, कांग्रेस सदस्य फिर से वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। उसी समय तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी अपनी सीटों से ही भाजपा नीत सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे।

हालांकि नारेबाजी के बीच ही सदन में एसपीजी एक्ट में संशोधन समेत चार बिल पेश किए गए। लेकिन हंगामा थमते नहीं देख कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। कांग्रेस सदस्य इसके बाद भी नारेबाजी करते रहे। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तृणमूल कांग्रेस नेताओं से बातचीत करतीं देखी गईं।

राज्यसभा में भी वही हाल

राज्यसभा में भी महाराष्ट्र को लेकर विपक्ष ने खूब हंगामा किया। विपक्षी सदस्य सुबह से ही महाराष्ट्र मामले पर सदन में चर्चा की मांग कर रहे थे। शुरुआती स्थगन के बाद 2 बजे कार्यवाही शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश का कहना था कि न्यायाधीन मामले पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती है। उन्होंने इस संबंध में सभापति एम. वेंकैया नायडू की व्यवस्था हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति शासन लागू करने या उसे खारिज करने के मुद्दे पर तत्संबंधी प्रस्ताव लाए जाने पर ही चर्चा हो सकती है।

लेकिन कांग्रेसी सदस्यों का कहना था कि मामला जब न्यायाधीन है तो इस मामले पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को बोलने की इजाजत क्यों दी गई? सुबह के सत्र में नकवी ने कहा था कि राज्यपाल के फैसले पर ठोस प्रस्ताव के जरिए ही चर्चा हो सकती है और विपक्ष ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा 'जुगाड़" के जरिए लोकतंत्र को 'हाईजैक" करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का हंगामा जारी रहने पर उपसभापति हरिवंश ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

कांग्रेस ने लगाया अपनी महिला सदस्यों से बदसलूकी का आरोप

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया है कि लोकसभा में वेल में आकर विरोध जताए जाने के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने उनकी पार्टी की महिला सदस्यों से बदसलूकी की।

चौधरी ने पत्रकारों को बताया- 'सुरक्षा कर्मियों ने हमारी महिला सांसदों के साथ बदसलूकी की है। संसद के भीतर ऐसा अनुभव कभी नहीं रहा। हम यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है?"

महाराष्ट्र मामले को लेकर सदन में वेल में आकर विरोध प्रदर्शन करने वाले सदस्यों को बाहर निकाले जाने के दौरान मार्शलों से धक्कामुक्की हो गई थी। तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने अपने साथ बदसलूकी का आरोप लगाया।

उन्होंने पत्रकारों को बताया- 'यह दुखद है कि राम्या हरिदास तथा मेरे साथ बदसलूकी हुई। हमने स्पीकर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।" चौधरी ने भी कहा कि सदन में उन्होंने जो देखा वह अभूतपूर्व था... कांग्रेस सांसदों को चारों ओर से धक्का दिया जा रहा था।

इस बीच, सूत्रों ने बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने वेल में बैनर लेकर आने वाले केरल से दो सांसदों- टीएन प्रथपन तथा हिबी ईडेन से माफी मांगने को कहा है। स्पीकर इन दोनों सांसदों को निलंबित भी कर सकते हैं।

Posted By: Yogendra Sharma

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