मुंबई। महाराष्ट्र में एक ही चरण में 15 अक्टूबर 2014 को चुनाव कराए गए थे, जिसके नतीजे 19 अक्टूबर 2014 को जारी हुए थे। कई मायनों में वह चुनाव अद्वितीय था जैसे पहली बार शिवसेना और भाजपा ने साथ मिलकर इस चुनाव को नहीं लड़ा था। इसके अलावा गैर-पारंपरिक रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बनाया गया था। महाराष्ट्र के मराठा बाहुल्य राजनीति में मुख्यमंत्री बनने वाले वह दूसरे ब्राह्मण नेता थे। इससे पहले शिवसेना के मनोहर जोशी सीएम बने थे। इस बार राज्य में चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चुनावी माहौल जरूर बनने लगा है। इस बार भी यह चुनाव कई मायनों में अहम होने जा रहा है।

केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है, लिहाजा केंद्र की राजनीति का असर महाराष्ट्र के चुनाव में भी साफ देखने को मिलेगा। इसमें सबसे अहम बात यह है कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किए गए वादे अनुच्छेद 370 को हटाने का ऐतिहासिक फैसला किया है। यह बहुचर्चित और बहु-प्रतीक्षित फैसला था, जिसकी वजह से मोदी सरकार की हर जगह तारीफ हो रही है। मजबूती के साथ मोदी सरकार ने पूरी दुनिया के देशों को अपने पक्ष में खड़ा किया है। भारत को घेरने की पाकिस्तान की हर कोशिश नाकाम रही है। महाराष्ट्र में भी इस फैसले का असर देखने को मिलेगा।

मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक की कु-प्रथा को भी मोदी सरकार ने ही खत्म किया है। इसे भी केंद्र की मोदी सरकार का बड़ा फैसला माना गया, जिसके बारे में कोई भी राजनीतिक पार्टी बात करने से भी डरती थी। इस बिल के लाए जाने के बाद यह पहला चुनाव होने जा रहा है। महाराष्ट्र के चुनाव के नतीजों से भाजपा को यह भांपने का मौका मिलेगा कि भाजपा की नीतियों के बारे में मुस्लिम समाज और खासकर मुस्लिम महिलाएं क्या सोचती हैं।

सात साल बाद देश में विकास दर पहली बार पांच फीसदी की दिशा में नकारात्मक रूप से बढ़ रही है। रोजगार में भी इसका असर पड़ा है और लोगों के पास काम करने के अवसर कम हुए हैं। वैश्विक मंदी के माहौल के असर से भारतीय कंपनियां भी अछूती नहीं हैं और देश में उपभोक्ता सामानों की मांग कम हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा है। ऐसे में देखना होगा कि महाराष्ट्र में इन राष्ट्रीय स्तर पर हुई घटनाओं का क्या असर पड़ता है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai