मुंबई। हिन्दी मनोरंजन जगत को कई सुपरहिट फिल्में देने वाला प्रतिष्ठित आर के फिल्म एंड स्टूडियो अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। मुंबई के चेंबूर इलाके में मौजूद इस स्टूडियो को गोदरेज प्रॉपर्टीज ने खरीद लिया है। नई कंपनी अब यहां हाईराइज़ बिल्डिंगों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराएगी। बॉलीवुड के 'शोमैन' राज कपूर ने 1948 में इस स्टूडियो की स्थापना की थी। इस स्टूडियो को राज कपूर ने अपने ही नाम आरके स्टूडियो पर रखा था। गोदरेज प्रॉपर्टीज अब यहां लग्जरी फ्लैट और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराएगी।

फिलहाल गोदरेज प्रॉपटीज ने सौदे की कीमत को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। लेकिन माना जा रहा है कि इसकी कीमत 50 से 60 करोड़ रुपये के बीच लगी होगी। क्योंकि यह स्टूडियो 2.2 एकड़ (लगभग 3.5 लाख वर्ग फिट) में फैला हुआ है। रियल इस्टेट के जानकारों के मुताबिक इस इलाके में जमीन की मौजूदा कीमत 24,000 से 28,000 रुपये प्रति वर्ग फिट है।

गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड (GPL) के कार्यकारी चेयरमैन पिरोजशा गोदरेज ने कहा कि यह प्रतिष्ठित जमीन प्रमुख शहरों के अहम इलाकों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत बनाने में मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि कंपनी यहां ऐसे फ्लैट्स बनाएगी, जिससे यहां रहने वाले लोगों को लक्ज़री लाइफ स्टाइल जीने का लुत्फ मिले।

वहीं, राज कपूर के बड़े बेटे और अभिनेता रणधीर कपूर ने कहा, 'चेंबूर में इस प्रॉपर्टी का कई दशकों तक मेरे परिवार के लिए बहुत ही भावनात्मक महत्व रहा है, जहां से आरके स्टूडियो संचालित होता रहा। हम इस स्थान के लिए GPL को चुनकर उत्साहित हैं, जो यहां एक नया अध्याय लिखने के साथ ही इसके समृद्ध इतिहास का निर्माण करेगा।'

कपूर खानदान ने क्यों बेचा स्टूडियो

आरके स्टूडियो से कपूर परिवार का भावनात्मक लगाव था। 1988 में राज कपूर के निधन के बाद उनके बड़े बेटे रणधीर कपूर ने इसकी जिम्मेदारी संभाली थी। लेकिन सितंबर, 2017 में स्टूडियो में लगी आग ने सबकुछ खत्म कर दिया। तब से स्टूडियो बंद पड़ा था। ऋषि कपूर ने नई तकनीक के साथ इसे दोबारा खड़ा करने की बात कही थी।

लेकिन रणधीर कपूर ने उसी वक्त कहा था कि अब इसे दोबारा पुराने रूप में लाना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होगा। आरके स्टूडियो को बेचने के फैसले पर ऋषि कपूर ने कहा था 'हमने अपने दिलों पर पत्थर रखकर और सोच-समझकर यह फैसला लिया है।

उन्होंने कहा हम सभी भाई एक-दूसरे से काफी जुड़े हैं लेकिन हमारे बच्चे और पोते क्या ऐसा कर पाएंगे? हम नहीं चाहते कि हमारे पिता के प्यार की निशानी किसी कोर्ट रूम का ड्रामा बने।' एक बड़ी वजह यह भी है कि ईस्टर्न मुंबई में बना यह स्टूडियो अब फिल्मकारों की पसंद नहीं रहा। ज्यादातर लोग अब अंधेरी और गोरेगांव में शूटिंग करना पसंद करते हैं।

Posted By: Neeraj Vyas