Vanraj Bhatia ने गोविंद निहलानी की फिल्म 'तमस' में यादगार संगीत दिया था। 2012 में उन्हें 'पद्म श्री' भी दिया गया। आज वे 92 साल के हैं और आर्थिक कंगाली से जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि बुढ़ापे से लड़ने के लिए उनके पास बैंक में एक रुपया भी नहीं है।

1970 और 80 के दशक में वनराज भाटिया कला सिनेमा में बड़ा नाम थे। लगभग हर आर्ट मूवी में उनकी ही संगीत हुआ करता था। अब वे काफी बीमार हैं। उनकी याददाश्त कम होती जा रही है, घुटनों में जबरदस्त दर्द रहता है और सुनाई देना भी लगभग बंद हो गया है। वे केवल अपने घर में काम करने वाले एक इंसान के भरोसे हैं।

अंग्रेजी अखबार 'मुंबई मिरर' से उन्होंने कहा है 'मेरे पास जरा पैसा नहीं बचा है। बैंक अकाउंट में तो एक रुपया भी नहीं है।' भाटिया फिलहाल अपना काम विदेशी क्रॉकरी बेच-बेचकर चला रहे हैं। धीरे-धीरे घर का सामान भी कम हो रहा है।

सबसे बुरा तो यह है कि वे लंबे समय से डॉक्टर के पास भी नहीं जा पाए हैं तो उन्हें जरा इल्म नहीं है कि उनकी शारीरिक स्थिति कैसी है। बता दें कि भाटिया की फिल्मों की लिस्ट में कुंदन शाह की 'जाने भी दो यारों' और अपर्णा सेन की '36 चौरंगी लेन' शामिल हैं। प्रकाश झा की 'हिप हिप हुर्रे' में भी उनका संगीत था। श्याम बेनेगल के वे पसंदीदा थे और दोनों ने साथ में Manthan, Bhumika, Junoon, Kalyug, Mandi, Trikaal और Suraj ka Saatvan Ghoda में काम किया है।

भाटिया ने लंदन की रॉयल एकेडमी ऑफ म्यूजिक से वेस्टर्न क्लासिकल पढ़ा था। उन्हें 1989 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड भी दिया गया। ऐसी कोई खबर नहीं है कि बॉलीवुड की हस्तियों में से कोई उनके साथ अभी संपर्क में है और ना ही सरकार की तरफ से कोई मदद है।