जूही चावला इन दिनों अपनी फिल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' में अहम किरदार निभाते नजर आने वाली रही हैं। हाल ही में जूही ने अपनी खास बातचीत में बताया कि 90 के दौर में किस तरह एक्ट्रेसेस में भी प्रतिस्पर्धा होती थी।

जूही कहती हैं ''मुझे पहले उतना समझ नहीं आता था कि किस स्क्रिप्ट को 'ना' नहीं कहना चाहिए और किसको 'हां'। चूंकि मैं टॉप की एक्ट्रेस थी तो जाहिर-सी बात है कि मैं हमेशा लीड किरदारों को ही प्राथमिकता देती थी।''

जूही ने यह राज भी खोला कि यह सच है कि उनके पास यश चोपड़ा दिल तो पागल है की स्क्रिप्ट लेकर आए थे और फिल्म में उन्हें करिश्मा कपूर वाला रोल दिया जा रहा था। यश चोपड़ा ने उन्हें तीन बार स्क्रिप्ट पढ़ने को कहा था और बार-बार किरदार के बारे में सोचने को कहा था कि वह इस फिल्म को करें। यश की पहली पसंद वही थीं।लेकिन जूही साफ कहती हैं '' मैं डर कर चुकी थी कि मुझे सेकेंड लीड नहीं करना है। चाहती थीं कि फिल्म में फर्स्ट लीड ही मिले। सो, मना कर दिया।'' बाद में यह रोल करिश्मा को मिला था।

जूही आगे कहती हैं ''ठीक है मुझे कुछ अच्छी फिल्में अपने इगो या स्टारडम के कारण नहीं करने को मिली लेकिन टॉप रहते हुए आप हमेशा लीड के बारे में ही सोचते हैं।'' फिर जूही ने बताया कि उन्हें मृत्युदंड भी ऑफर हुई थी, बाद में वह रोल माधुरी को गया था। उन्हें फिल्म की कहानी समझ नहीं आयी थी तो उन्होंने इस फिल्म को करने से भी इंकार कर दिया था। फिर उन्हें फिल्म जुदाई भी ऑफर हुई थी लेकिन उन्हें उसमें भी उर्मिला वाला किरदार मिल रहा था और सेकेंड लीड होने के कारण वह फिल्म नहीं करना चाहती थीं।

जूही स्वीकारती हैं कि यह बहुत सामान्य बात है कि आप जब एक फील्ड में होते हैं तो कॉम्पीटिशन होते ही हैं। सभी हेल्दी कांम्पीटिशन करते थे। जूही ने तो यह भी कहा कि माधुरी क्यों, रवीना करिश्मा सभी में प्रतिस्पर्धा होती थी। फिर जूही हंसते हुए कहती हैं ''जब '1942 लव स्टोरी' आयी थी, तब मैं तो मनीषा को देख कर बोल उठी थी कि अपना करियर तो खत्म हो जाएगा। इतनी सुंदर नयी लड़की आयी है, अब हमें नया काम कौन देगा।''

जूही ने यह भी कहा कि मीडिया भी इसका जिम्मेदार है। हमेशा तुलना करता रहता है तो जाहिर है कि मन में प्रतिस्पर्धा आएगी ही।

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