इस फिल्म में नेगेटिव रोल के लिए अजय देवगन को मिला था फिल्मफेयर

बॉलीवुड के सिंघम अजय देवगन आज 49 साल के हो गए। नशीले आंखे और दमदार आवाज वाले अजय देवगन के कई यादगार फिल्में दी। अभिनय के अलावा अजय देवगन निर्देशन और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी हाथ आजमा रहे हैं। अपनी शानदार एक्टिंग की वजह से अब तक अजय देवगन दो राष्ट्रीय पुरस्कार और तीन फिल्मफेयर जीत चुके हैं। साल 2016 में अजय देवगन को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार (चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से भी सम्मानित किया गया था।

उनके जन्मदिन के खास मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनके पांच ऐसे रोल के बारे में जो यह साबित करते हैं कि वे आसानी से किसी भी रोल में फिट हो सकते हैं। बात चाहे कॉमेडी की हो या एक्शन की बॉलीवुड के सिंघम ने कोई ऐसा जोन नहीं छोड़ा जिसमें उन्होंने हाथ ना आजमाया हो...।

तरंग भारद्वाज - दीवानगी

फिल्म 'दीवानगी' में अजय देवगन ने शानदार एक्टिंग की थी। इस फिल्म में उनके दो अलग-अलग रूप देखने को मिले थे। डरे हुए और शर्मीले तरंग से भयंकर और शातिर रणजीत बनने की उनकी इस कहानी ने लोगों को काफी प्रभावित किया था। इस फिल्म में नेगेटिव रोल के लिए अजय देवगन ने फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता था।

वनराज- हम दिल दे चुके सनम

फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' में अजय ने वनराज का रोल प्ले किया था। मुख्य रूप से यह फिल्म सलमान खान और ऐश्वर्या राय बच्चन की फिल्म थी, लेकिन अजय की एक्टिंग और दयालु स्वभाव ने लोगों का दिल जीत लिया था।

गोपाल - गोलमाल फ्रेंचाइजी

अपनी गंभीर और एक्शन से भरपूर भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले अजय देवगन ने रोहित शेट्टी की फिल्म 'गोलमाल' में शानदार कॉमेडी की। उनकी कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को काफी हैरान कर दिया था। गोलमाल फ्रेंचाइजी में वे गोपाल का रोल प्ले करते दिखाई दिए।

बाजीराव सिंघम - सिंघम

अजय देवगन ने बड़े पर्दे पर एक ईमानदार और उग्र पुलिस अधिकारी का किरदार भी निभाया, जिसे देखना आज भी लोगों के लिए काफी रोमांचक होता है। फिल्म सिंघम में अजय देवगन के क्लास एक्ट और शानदार एक्शन से फैंस काफी इंप्रेस हुए।

सुल्तान मिर्जा - वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबाई

फिल्म 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबाई' में अजय देवगन का गैंगस्टर लुक लोगों को काफी पसंद आया। उनके हावभाव, चलने की स्टाईल से लेकर उनके डायलॉग डिलीवरी तक सब कुछ देखकर ऐसा लगता है जैसे वह इस किरदार को निभाने के लिए पैदा हुए थे। उनके संवाद जैसे 'दुआ में ये याद रखना ' और ' जब दोस्त बनाकर काम हो सकता है तो दुश्मन क्यों बनाए' आज भी लोगों के जहन में ताजा है।

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