Happy Birthday Guru Dutt: वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोणे। जी हां हिंदी सिने जगत के मशहूर अभिनेता, निर्देशक गुरुदत्त का वास्तविक नाम यही था। अपने समय में प्यासा, कागज़ के फूल, साहिब बीबी और ग़ुलाम और चौदहवीं का चांद जैसी चर्चित फिल्में बनाने वाले गुरुदत्त साहब काव्यात्मक और कलात्मक फिल्मों के व्यावसायिक चलन को विकसित करने के लिए जाने जाते थे। प्रोफेशनल लाइफ में गुरुदत्त बहुत सफल रहे, लेकिन उनकी पर्सनल लाइफ कुछ गलतफहमियों की वजह से बिखर गई। 8 जुलाई को उनका 94वां जन्मदिन है, इस खास मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में...

ऐसे हालात में लिखी थी फिल्म प्यासा

1950-60 के दशक में बॉलीवुड को विश्व मानचित्र पर पहचान दिलाने का श्रेय गुरुदत्त को ही जाता है। कोलकाता में एक टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी से करियर की शुरुआत करने वाले गुरुदत्त जल्द ही नौकरी छोड़कर वापस अपने मां-बाप के पास मुम्बई लौट आए। यहां अभिनय के साथ निर्देशक विश्राम बेडेकर के सहायक के तौर पर काम करने लगे। 1947 में उन्हें काम के फिर लाले पड़ गए। 10 महीने वे परिवार के साथ माटुंगा में रहे और लिखना जारी रखा। इसी दौरान उन्होंने प्यासा फिल्म लिख डाली।

लव लाइफ

फिल्म 'बाज़ी' के सेट पर उनकी मुलाकात गायिका गीता रॉय से हुई थी। उस समय गीता एक पार्श्व गायिका के रूप में काफी मशहूर थीं। इस दौरान दोनों में प्यार हो गया और वे अक्सर गुरुदत्त से मिलने के लिए उनके घर जाया करती थीं। गुरुदत्त के परिवार को गीता बहुत पसंद थी, इसलिए जल्द ही ये दोनों शादी के बंधन में बंध गए। लेकिन, फिल्म 'प्यासा' बनने के दौरान गीता और गुरुदत्त के बीच दूरियां आनी शुरू हो गई थीं। इन दूरियों का कारण था उनकी हीरोइन वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियां। गुरुदत्त और वहीदा के रिश्ते की वजह से गीता ने उनका घर छोड़ दिया था।

मरने के तरीकों पर बात करते थे गुरुदत्त

गुरुदत्त अपने दोस्त अबरार से हमेशा मरने के तरीकों पर बात करते थे। अपनी पत्नी गीता से फोन पर हुए झगड़े के बाद 9 अक्तूबर की देर रात अबरार और गुरुदत्त ने एक साथ खाना खाया। 2 बजे रात को अबरार अपने घर चले गए। उसी रात गुरुदत्त ने शराब के नशे में नींद की गोलियां खा लीं और इस तरह ओवरडोज से उनका निधन हो गया।

काबिलियत जिसे दुनिया ने सराहा

महान निर्देशक और कलाकार गुरुदत्त की बनाई फिल्में आज भी लोगों के जहन में उमड़ती रहती हैं। उनकी काबिलियत ही थी कि प्यासा और काग़ज़ के फूल जैसी फिल्मों को टाइम पत्रिका के 100 सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों की सूचि में शामिल किया। मरणोपरांत 2010 में उन्हें cnn ने एशिया के 25 सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं की लिस्ट में शामिल किया। गुरुदत्त को भारत का ओरसन वेल्स कहा जाता था।

Posted By: Sushma Barange